रविवार, 29 जनवरी, 2006 को 17:50 GMT तक के समाचार
नेपाल में स्थानीय निकायों का चुनाव लड़ने जा रहे क़रीब छह सौ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं.
माओवादियों ने इन चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है. इस कारण हिंसा की आशंका काफ़ी बढ़ गई है और उम्मीदवारों में दहशत है.
उम्मीदवारों के नाम वापस लेने का अर्थ ये हुआ कि आठ फ़रवरी को होने वाले चुनावों में 4,146 में से लगभग एक हज़ार सीटों के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं होगा.
प्रशासन ने सैकड़ों उम्मीदवारों को सुरक्षित मकानों में रखा है ताकि उन्हें माओवादियों के हमलों से बचाया जा सके.
जनकपुरधाम इलाक़े में सत्तर उम्मीदवारों को एक सरकारी ट्रेनिंग केंद्र में कड़ी सुरक्षा में रखा गया है.
उम्मीदवार नदारद
पूरे देश से ख़बरें आ रही हैं कि उम्मीदवारों की परेशान पत्नियाँ और डरे हुए रिश्तेदार उन्हे नाम वापस लेने पर मजबूर कर रहे हैं.
इस तरह की ख़बरें भी हैं कि अधिकारियों ने कुछ लोगों पर दबाव डालकर उन्हें चुनाव में खड़े होने पर मजबूर किया.
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में 60 प्रतिशत पर कोई उम्मीदवार नहीं हैं.
कई ज़िलों में सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार हैं और उनको चुनौती देने वाला कोई नहीं है.
चुनाव आयोग के प्रवक्ता तेजमुनि बज्राचार्य ने कहा, “सिर्फ़ 36 नगरपालिकाओं में ही चुनाव होंगे क्योंकि बाक़ी 22 नगरपालिकाओं में उम्मीदवार ही नहीं हैं.”
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र की सरकार का कहना है कि इन चुनावों के बाद जनतंत्र की और बढ़ने का रास्ता साफ़ होगा.
विपक्षी बहिष्कार
लेकिन माओवादियों के अलावा प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने भी इन चुनावों का बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है.
विपक्ष का कहना है कि राजा ये चुनाव इसलिए करवा रहे हैं ताकि सत्ता पर अपनी पकड़ को न्यायसंगत ठहरा सकें.
महाराजा ज्ञानेंद्र ने फ़रवरी 2005 में सत्ता पर सीधे नियंत्रण कर लिया था.
काठमांडू में एक विद्रोही नेता ने चुनाव में हिस्सा ले रहे लोगों को सीधी चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो अंजाम बहुत बुरा होगा.
महाराजा ज्ञानेंद्र ने 2007 के मध्य तक नेपाल में आम चुनाव करवाने का वादा किया है.