शुक्रवार, 27 जनवरी, 2006 को 16:22 GMT तक के समाचार
नेपाल में अगले महीने होने वाले स्थानीय निकाय के चुनाव के लिए उम्मीदवार कम पड़ रहे हैं.
गुरूवार को नेपाल में नामांकन दाख़िल करने की समय सीमा समाप्त होने के बाद पता चला कि जितनी सीटों के लिए चुनाव होना है, उतने भी उम्मीदवार नहीं हैं.
नेपाल के विपक्षी दलों और माओवादी विद्रोहियों ने इन चुनावों का बहिष्कार करने की घोषणा की है.
विपक्ष का आरोप है कि राजा ज्ञानेंद्र इन चुनावों के ज़रिए अपने शासन के लिए वैधता हासिल करना चाहते हैं.
पिछले वर्ष फ़रवरी में राजा ज्ञानेंद्र ने निर्वाचित प्रधानमंत्री शेर बहादुर देऊबा की सरकार को बर्ख़ास्त करके सत्ता अपने हाथ में ले ली थी, इसकी वजह ये बताई गई थी कि देऊबा सरकार माओवादी विद्रोहियों को नियंत्रित करने में नाकाम रही है.
इसके बाद से नेपाल में विपक्षी दल लगातार लोकतंत्र बहाली की माँग कर रहे हैं, नेपाल में सात दलों का एक गठबंधन बनाया गया है जो लगातार राजशाही का विरोध कर रहा है.
चुनाव
नेपाल के चुनाव आयोग का कहना है कि कुल 3700 उम्मीदवारों ने नामांकन का पर्चा भरा है जबकि देश भर में नगर निगमों की 4100 सीटों पर चुनाव होने हैं.
कई ऐसी सीटें हैं जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार है यानी कोई मुक़ाबला नहीं है, कम से कम चार सौ सीटें ऐसी हैं जहाँ कोई उम्मीदवार नहीं है.
चुनाव आयोग के प्रवक्ता का कहना है कि रविवार को नामांकन की जाँच किए जाने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की जाएगी.
प्रवक्ता तेज मुनि बज्राचार्य ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए यह स्थिति संतोषजनक ही कही जाएगी.
विपक्षी पार्टियों ने चुनाव लड़ने वाले लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का आह्वान किया है जबकि माओवादी विद्रोहियों ने चुनाव में बाधा डालने की धमकी दी है.
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि मतदान तय कार्यक्रम के अनुसार आठ फरवरी को ही होगा.