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शुक्रवार, 27 जनवरी, 2006 को 16:14 GMT तक के समाचार

ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी के लिए सहमति

भारत और सऊदी अरब ने रणनीतिक रूप से ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी करने का फ़ैसला किया है.

सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला के भारत दौरे के आख़िरी दिन शुक्रवार को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच ऊर्जा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी समझौते पर दस्तख़त हुए.

शाह अब्दुल्ला के दौरे के आख़िरी दिन जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है कि ऊर्जा के क्षेत्र में जो समझौता हुआ है, उसमें सुव्यवस्थित रूप से कच्चे तेल की ज़्यादा आपूर्ति भी शामिल है.

संयुक्त घोषणापत्र पर शाह अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दस्तख़त किए.

दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहाँ तेल और गैस क्षेत्र में साझा निवेश पर भी सहमति जताई है. इसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र भी शामिल हैं.

इस सहमति में एक-दूसरे के साथ किसी अन्य तीसरे देश में भी इसके लिए साझा निवेश की बात कही गई है. इसके अलावा भारत में तेल शोधन, मार्केटिंग और स्टोरेज़ के लिए सऊदी अरब के निवेश पर भी रज़ामंदी हुई है.

आपूर्ति

लेकिन यह सऊदी अरब में गैस पर आधारित उर्वरक प्लांट स्थापित भारत और सऊदी अरब की साझा कोशिश की व्यावहारिकता पर निर्भर करेगा.

सऊदी अरब इस समय भारत को 17 करोड़ 50 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति करता है. जो भारत की तेल ज़रूरत का एक चौथाई है.

भारत अपनी आपूर्ति का 70 प्रतिशत आयात करता है और इस समय वह केंद्रीय एशिया से दक्षिण अमरीका तक आपूर्ति करने वाले नए देशों की तलाश कर रहा है.

सऊदी अरब इस समय दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है. सऊदी अरब भारत और चीन के साथ अपने संबंध मज़बूत करना चाहता है जहाँ की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है लेकिन इससे वहाँ की ऊर्जा ज़रूरतें भी बढ़ी हैं.

भारत और सऊदी अरब के बीच 'आतंकवाद' से निपटने के लिए द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और विश्व स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति हुई.

बयान में कहा गया है कि दोनों सरकारें 'आतंकवाद', नशीली दवाओं और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए भी सहयोग करने पर राज़ी हो गए हैं.