बुधवार, 25 जनवरी, 2006 को 09:17 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
जिंदा या मुर्दा? आदमी या भूत? ये शब्द राजू रघुवंशी के जीवन का आधार प्रश्न बन गए हैं.
राजू रघुवंशी का कहना है कि वह जीवित हैं लेकिन उसके परिजन और गाँववाले समझते हैं कि वह राजू रघुवंशी का भूत है और उन्हें परेशान करने के लिए वापस आया है.
एक छोटे अपराध में जेल भेजे गए रघुवंशी के बारे में अफ़वाह उड़ गई थी कि वह जेल में मर गया है इसीलिए जब वह मंडला जिले के कटरा ग्राम वापस पहुँचा तो लोग या तो भूत-भूत कहकर भागने लगे और घरों के दरवाज़े खिड़कियाँ बंद होने लगीं.
वे कहते हैं कि उसके रिश्ते के भाइयों ने यह भी कहा कि उन्होंने क्रियाकर्म कर दिया है इसलिए राजू का भूत उन्हें न सताए.
उनके चचेरे भाई की पत्नी गणेशी का कहना है कि उन्हें ख़बर मिली की राजू रघुवंशी जेल में ही मर गए हैं और उनकी अंतयोष्टि भी जेल अधिकारियों ने ही कर दी है.
गणेशी ने कहा, "पंचायत ने यह फ़ैसला किया कि हम जल्द ही उनके सारे संस्कार कर दें जो हमने कर दिए. बाद में वह वापस आ गए तो हम सब भौचक्के रह गए."
अब तक अविवाहित और घरबार से वंचित हो गए राजू रघुवंशी अब दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं और उनकी एक ही कोशिश है कि वह किसी तरह यह साबित कर पाएँ कि वह जीवित हैं.
उनके वकील मनोहर जोशी ने राजू रघुवंशी के रिश्तेदारों के ख़िलाफ़ मानहानि का मुकदमा दर्ज़ किया है.
मनोहर जोशी का कहना है कि उनके रिश्तेदारों ने भूत होने की अफ़वाह हो सकता है जायदाद की लालच में उड़ाई हो.
दरअसल कटरा में राजू रघुवंशी की थोड़ी बहुत ज़मीन है.
मंडला के पुलिस अधीक्षक एन वी वयागाँगकर कहते हैं कि राजू रघुवंशी जेल में सख़्त बीमार पड़ गया था. जिसके कारण उसे जबलपुर अस्पताल भेजा गया जहाँ से यह अफ़वाह फैल गई कि वह मर गया है.