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शनिवार, 21 जनवरी, 2006 को 17:58 GMT तक के समाचार

काठमांडू में प्रदर्शन, झड़पें और गिरफ़्तारियाँ

नेपाल की राजधानी काठमांडू में लोकतंत्र बहाली की माँग कर रहे विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने प्रतिबंध के बावजूद प्रदर्शन किए हैं और प्रशासन के अनुसार लगभग 200 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

कई जगह पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस का प्रयोग किया.

विपक्षी दलों के प्रदर्शन की तस्वीरें

राजधानी काठमांडू के मुख्य चौराहे में पूरी दोपहर पुलिस लोगों को गिरफ़्तार करती रही और कई झड़पें भी हुईं. वहाँ जमा भीड़ ने पुलिस पर ईंटें और पत्थर फेंके.

पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और वहाँ से जा रहे कुछ आम लोगों की भी पिटाई की और कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की ख़बर है.

चाहे पुलिस ने लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार करने की बात कही है लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि गिरफ़्तार किए गए उनके कार्यकर्ताओं की संख्या इससे काफ़ी ज़्यादा है.

कई नेता नज़रबंद

राजनीतिक दलों ने फिर शनिवार को प्रदर्शन किए. पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला समेत पाँच विपक्षी नेताओं को 90 दिन के लिए नज़रबंद कर दिया गया है.

इन नेताओं के घरों के बाहर शनिवार को सशस्त्र पुलिस को तैनात कर दिया गया.

बताया गया है कि इन दलों के 120 सक्रिय कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.

नेपाल में पिछले कुछ दिनों में विपक्षी दलों के 300 से भी अधिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ़्तार किया गया था.

शनिवार को इन गतिविधियों के बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हुई है.

लेकिन नेपाल नरेश के मंत्रियों ने पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा है ऐसी रैलियों में माओवादी विद्रोहियों घुसने का डर है लेकिन विपक्षी दलों ने इससे इनकार किया है.

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय में अधिकारी किम हॉवेल्स ने एक बयान में कहा,"मैं नेपाल नरेश से तत्काल हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और राजनीतिक दलों से वार्ता शुरू करने का आग्रह करता हूँ".

काठमांडू में रात का कर्फ़्यू पहले से ही लगा हुआ है और शहर में रैलियों पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

स्थानीय चुनाव

नेपाल में विपक्षी दल अपने समर्थकों से अगले महीने होने वाले स्थानीय चुनावों का बहिष्कार करने के लिए कह रहे हैं और पहले रैली इन चुनावों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने के लिए ही बुलाई गई थी.

राजनीतिक दल इन चुनावों को अलोकतांत्रिक है और कहते हैं कि ये सत्ता पर नेपाल नरेश की पकड़ बढ़ाने के लिए करवाए जा रहे हैं.

नेपाल नरेश ने पिछले वर्ष फ़रवरी में लोकतांत्रिक सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.