भारत के पूर्व विदेश मंत्री और राज्यसभा में भाजपा के नेता जसवंत सिंह लगभग 100 तीर्थयात्रियों के जत्थे के साथ 30 जनवरी को बलूचिस्तान की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं.
विभाजन के बाद यह पहला मौक़ा है जब भारतीय तीर्थयात्रियों को बलूचिस्तान स्थित हिंगलाज मंदिर जाने की अनुमति दी गई है.
जसवंत सिंह के नेतृत्व में लगभग 100 तीर्थयात्रियों का जत्था पाकिस्तान के सड़क के रास्ते जाएगा. इसमें 20 मुस्लिम तीर्थयात्री भी शामिल हैं.
भाग्य की देवी मानी जानेवाली हिंगलाज देवी का मंदिर बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के तट पर स्थित है और दिलचस्प तथ्य यह है कि मुसलमान इसे 'बीबी नानी' के श्रद्धास्थल के नाम से मानते हैं.
राजस्थान और गुजरात के सीमावर्ती ज़िलों में रहनेवाले लोग इस मंदिर में पूजा अर्चना करते रहे हैं. लेकिन बंटवारे के बाद लोगों की आवाजाही बंद हो गई.
जसवंत सिंह राजस्थान से हैं और उन्होंने इसे निजी यात्रा बताय और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस यात्रा को हकीकत बनाने के लिए धन्यवाद दिया.
यह मंदिर कराची से पाँच घंटे की दूरी पर है और इसके आसपास कोई बसावट नहीं है.
जिन्ना की मज़ार
लेकिन जसवंत सिंह ने साफ़ किया कि वो किसी बलूच नेता ने नहीं मिलेंगे और पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में नहीं पड़ेंगे.
भारत ने हाल में बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चिंता जताई थी. पाकिस्तान ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया था.
जसवंत सिंह ने स्पष्ट किया कि वो एक अच्छे अतिथि साबित होंगे और कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं करेंगे.
उन्होंने कहा कि वो कुछ समय कराची में बिताएँगे और पाकिस्तान के संस्थापक क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना की मज़ार पर भी जाएँगे.
ग़ौरतलब है कि भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी भी कुछ समय पहले जिन्ना की मज़ार पर गए थे और उन्होंने उन्हें धर्मनिरपेक्ष बताया था.
उनके इस बयान के बाद संघ परिवार में घमासान छिड़ गया था और आडवाणी को पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा था.