शुक्रवार, 20 जनवरी, 2006 को 16:26 GMT तक के समाचार
अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि अमरीका और भारत के बीच परमाणु समझौते के कार्यान्वयन की राह में अब भी कई अवरोध हैं.
हालाँकि उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि अंतत: सारे अवरोधों से पार पा लिया जाएगा.
बर्न्स ने दिल्ली में भारतीय अधिकारियों से दो दिनों की चर्चा के बाद यह बयान दिया है.
उल्लेखनीय कि दोनों देशों के बीच पिछले साल हुए समझौते के तहत अमरीका असैनिक कार्यों के लिए भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी देगा.
समझौते को अभी अमरीकी संसद की मंज़ूरी नहीं मिली है.
भारत-अमरीका परमाणु समझौते के विरोधियों का कहना है कि इससे परमाणु अप्रसार संबंधी प्रयासों को धक्का लगेगा.
अनूठी स्थिति
दिल्ली में अधिकारियों से बातचीत के बाद अमरीकी विदेश उपमंत्री ने कहा, "भारत की स्थिति बिल्कुल ही अलग तरह की है. इन वार्ताओं में जटिलताएँ और कठिनाइयाँ हैं जो कि ऐसे मामलों में स्वाभाविक ही है."
दोनों देशों के परमाणु समझौते के कार्यान्वयन में मुख्य बाधा है अमरीका का यह आग्रह कि भारत सैनिक और असैनिक परमाणु कार्यक्रमों को अलग करे, और साथ ही असैनिक परमाणु प्रतिष्ठानों में अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को जाने की इजाज़त दे.
संवाददाताओं के अनुसार ऐसा करना आसान नहीं होगा क्योंकि माना जाता है कि भारत के कई परमाणु प्रतिष्ठानों सैनिक और असैनिक दोनों तरह के कार्यक्रमों में शामिल हैं.
अमरीका में राजनीतिज्ञों और नीति निर्माताओं का एक वर्ग यह मानता है कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले भारत को परमाणु मसले पर छूट देने से ईरान जैसे देशों को ग़लत संदेश जाएगा.
शुक्रवार को दिल्ली में बर्न्स ने ईरान को विश्व शांति के लिए ख़तरा बताया है.