शुक्रवार, 20 जनवरी, 2006 को 05:29 GMT तक के समाचार
नेपाल सरकार ने कहा है कि काठमांडू में एक लोकतंत्र समर्थक रैली को रोकने के लिए लगाए गए कर्फ़्यू का उल्लंघन करने के कारण 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.
सात पार्टियों के विपक्षी गठबंधन की लोकतंत्र समर्थक रैली को रोकने के लिए काठमांडू में सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक कर्फ़्यू लगा दिया गया था.
काठमांडू के बाहर भी कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है लेकिन उनकी सही संख्या अभी पता नहीं चल सकी है.
नेपाल के मानवाधिकार आयोग का कहना है कि इस रैली से पहले ही क़रीब एक सौ राजनेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
विपक्षी दलों ने कहा है कि वे शनिवार को अपना विरोध जारी रखेंगे.
कर्फ़्यू
नेपाल सरकार ने ये कहते हुए रैली करने की अनुमति नहीं दी कि उन्हें सूचना मिली है कि माओवादी इस रैली में आ सकते हैं और हिंसा भड़का सकते हैं.
लेकिन माओवादियों ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया है.
काठमांडू की सड़कों पर शुक्रवार को हज़ारों की संख्या में सेना के जवान मौजूद थे लेकिन विपक्षी गठबंधन ने कहा था कि वे पाबंदी का उल्लंघन करते हुए विरोध प्रदर्शन करेंगे.
काठमांडू में मोबाइल फ़ोन भी काम नहीं कर रहे हैं. लेकिन सरकार का कहना है कि सुरक्षा कारणों से ये क़दम उठाए गए हैं.
काठमांडू में कुछ दिन पहले ही रात का कर्फ़्यू लगाया गया था जो अभी भी चल रहा है.
पाबंदी और बहिष्कार
हाल के दिनों में बढ़ती माओवादी हिंसा के कारण रात का कर्फ़्यू और राजनीतिक रैलियों पर पहले ही पाबंदी लगा दी गई है.
विपक्षी पार्टियों ने अगले महीने होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के बहिष्कार भी घोषणा कर रखी है.
विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये चुनाव राजा ज्ञानेंद्र की सरकार को ही सुरक्षित करेंगे.
इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके कहा कि नेपाल की सरकार का क़दम उन लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है, जो नेपाल में शांति और स्थिरता लाना चाहते हैं.
यूरोपीय संघ ने भी विपक्षी नेताओं की गिरफ़्तारी पर चिंता व्यक्त की है.
नेपाल की विपक्षी पार्टियाँ पिछले साल फरवरी में राजा ज्ञानेंद्र के कार्यकारी अधिकार अपने हाथ में ले लेने के बाद से ही विरोध प्रदर्शन कर रही हैं.