असित जौली
बीबीसी संवाददाता, अमृतसर से
पाकिस्तान के शहर लाहौर और भारत के अमृतसर के बीच अमन की प्रतीक बस सेवा गुरूवार को शुरू हो गई और लाहौर से चली बस दोपहर बाद अमृतसर पहुँच गई.
वाघा सीमा पहुँचने पर बस यात्रियों का ज़ोरदार स्वागत किया गया. इस दौरान एक ओर भांगड़ा हो रहा था तो दूसरी ओर बस पर फूल बरसाए जा रहे थे.
पाकिस्तान ने अपनी बस का नाम 'दोस्ती' रखा है और भारत ने अपनी बस का नाम 'पंज आब' (पंजाब की पाँच नदियाँ) रखा है.
भारत और पाकिस्तान के बीच यह तीसरी बस सेवा है. इस बस से 26 यात्री आए हैं जिनमें 15 अधिकारी हैं.
बस यात्रियों में मशहूर गायिका रेशमा भी शामिल हैं.
रेशमा ने पत्रकारों को बताया कि उनका पहले विमान से भारत आने का कार्यक्रम था लेकिन जब उन्हें बस की जानकारी मिली तो उन्होंने अपना हवाई यात्रा का टिकट रद्द करवाकर बस का टिकट लिया.
अगले दिन यानी 21 जनवरी को ये बस वापस लाहौर लौट जाएगी. भारत की ओर से बस 24 जनवरी को अमृतसर से लाहौर के लिए रवाना होगी और अगले दिन वापस लौटेगी.
45 किलोमीटर की इस यात्रा के लिए भारतीय रुपए में किराया है 740 रुपए जबकि पाकिस्तानी रुपए में 900 रुपए.
दोनों देशों के अधिकारी इस बस सेवा को शांति प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण क़दम मानते हैं.
यह पहली बार है कि दोनों देशों के पंजाब प्रांत बस सेवा से जुड़ रहे हैं. लाहौर-अमृतसर बस सेवा के बाद दोनों देश अमृतसर और ननकाना साहिब के बीच भी बस सेवा शुरू करने पर विचार कर रहे हैं.
बस सेवा
अभी दोनों देशों के बीच लाहौर और नई दिल्ली के बीच बस सेवा पहले से ही चल रही है. जबकि भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को जोड़ने वाली श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा भी जारी है.
लाहौर और अटारी के बीच समझौता एक्सप्रेस रेल सेवा तो चल ही रही है. इसके अलावा एक फरवरी से मुनाबाव और खोखरापार के बीच रेल सेवा शुरू होने वाली है.
इस रेल सेवा के लिए समझौते पर दस्तख़त करने के लिए एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 जनवरी को पाकिस्तान जा रहा है. हाल ही में नई दिल्ली में हुई बातचीत में इस रेल सेवा को शुरू करने पर सहमति हुई थी.
लाहौर और अमृतसर के बीच शुरू हो रही बस सेवा दोनों ओर के कई परिवारों के लिए सिर्फ़ एक बस सेवा नहीं है.
बँटवारे के बाद कई सिख परिवार भारत चले आए थे. उन्हें न सिर्फ़ उस इलाक़े में जाने का मौक़ा मिल रहा है, बल्कि वे गुरुनानक देव के जन्म स्थान ननकाना साहिब भी जा सकेंगे.
इसी तरह पाकिस्तान में रहने वाले कई सिख परिवारों को अपने तीर्थस्थान अमृतसर के स्वर्ण मंदिर आने का मौक़ा मिल रहा है.