शुक्रवार, 20 जनवरी, 2006 को 17:13 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता
भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में जूनियर डॉक्टरों की पिछले सोमवार से जारी हड़ताल समाप्त हो गई है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरकों की हड़ताल को गैर क़ानूनी घोषित कर दिया था.
सरकार ने डॉक्टरों को शुक्रवार सुबह 10 बजे तक काम पर वापस लौटने की चेतावनी दी थी.
राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉक्टर कमल साहनी ने कहा है कि सरकार के कड़े रवैये के बाद जूनियर डॉक्टरों ने बिना शर्त अपनी हड़ताल वापस ले ली.
राज्य के सभी सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यह हड़ताल नौचंदी एक्सप्रेस ट्रेन में पुलिस जवानों और डॉक्टरों के बीच हुई मारपीट के बाद शुरू हुई थी.
सरकार ने घटना के लिए ज़िम्मेदार कुछ पुलिस जवानों को निलंबित कर दिया लेकिन जूनियर डॉक्टर ट्रेन हादसे में शामिल सभी 45 पुलिस रंगरूटों को बर्खास्त करके जेल भेजने की माँग कर रहे हैं.
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से सभी मेडिकल कॉलेजों में सेवाएँ अस्तव्यस्त हो गई थीं.
आवश्यक सेवा क़ानून
राज्य सरकार के मुख्य सचिव आर रमणी ने जल्दबाज़ी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मलेन में बताया कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर आवश्यक सेवा क़ानून के तहत रोक लगाई गई.
उन्होंने कहा कि हड़ताल समाज के विरूद्ध है और इसलिए सरकार सख़्ती करेगी.
मुख्य सचिव ने कहा था कि जो जूनियर डॉक्टर शुक्रवार की सुबह 10 बजे तक काम पर नहीं आएंगे उनकी नौकरी ख़त्म करने के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है.
सरकार ने सभी मेडिकल कॉलेजों में भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी थी.
अभी कुछ दिनों पहले लखनऊ में छात्रों ने मेडिकल कॉलेज में आग लगाकर करोड़ों रुपए के समान का नुक़सान किया था.
कहा जा रहा है कि कुछ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के मालिक मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल को उकसा रहे हैं. सरकार ने इन लोगों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की चेतावनी दी है.