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सुनील रामन
बीबीसी संवाददाता, बंगलौर

राज्यपाल के अभिभाषण का बॉयकॉट

कर्नाटक में जनता दल सेक्यूलर के एक धड़े ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के लिए दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है.

जनता दल-सेक्यूलर के एक धड़े और भाजपा ने राज्यपाल के अभिभाषण का बॉयकॉट किया.

राज्यपाल के अभिभाषण पर इसलिए सवाल उठाए जा रहे थे कि अगर धरम सिंह सरकार वाकई अल्पमत में आ गई है तो सरकार एक अल्पमत सरकार की नीतियों का विवरण कैसे दे सकती है.

इस बीच बुधवार देर रात जनता दल (सेक्यूलर) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था.

धरम सिंह ने बुधवार रात राज्यपाल से मुलाक़ात की थी. राज्यपाल टीएन चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री धरम सिंह को विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा है.

आज राज्यपाल एक प्रेस काँफ़्रेंस में बहुमत साबित करने की तिथि की घोषणा कर सकते हैं.

बुधवार को जनता दल (सेक्यूलर) के एक बड़े धड़े के समर्थन वापस के बाद कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार संकट में आ गई है.

लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री धरम सिंह ने कहा है कि उनकी सरकार पर कोई ख़तरा नहीं है और विधानसभा में वे अपना बहुमत साबित कर देंगे.

आश्वासन

कुमारस्वामी ने कहा है कि राज्यपाल ने उनके दावे पर विचार करने का आश्वासन दिया है. जनता दल (एस) और बीजेपी ने 224 में से 140 विधायकों के समर्थन का दावा किया है.

दूसरी ओर जनता दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा है कि वे कुमारस्वामी के दावे को नज़रअंदाज़ कर दें क्योंकि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

उन्होंने पत्र में कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नेता वही ये फ़ैसला कर सकते हैं कि किस पार्टी को समर्थन देना है या नहीं.

उधर कांग्रेस की प्रवक्ता अंबिका सोनी ने दिल्ली में कहा है कि राज्यपाल देवेगौड़ा के पत्र की अनदेखी न करें.

बैठक

राजधानी बंगलौर में आज बीजेपी और जनता दल (एस) के कुमारस्वामी धड़े की बैठक भी हो रही है. दोनों पार्टियों के बीच सरकार बनाने के फ़ॉर्मूले पर सहमति हो गई है.

समझौते के अनुसार दोनों पार्टियाँ बारी-बारी से 20-20 महीने के लिए सरकार का नेतृत्व करेंगी. सरकार में बीजेपी के 18 और जनता दल (एस) के 16 मंत्री होंगे.

और तो और दोनों दलों ने विभिन्न बोर्डों और निगमों के अध्यक्ष पद को लेकर भी समझौता कर लिया है. समझौते के तहत 70 बोर्ड और निगमों में से 40 का अध्यक्ष पद बीजेपी को और 30 का अध्यक्ष पद जनता दल (एस) को मिलेगा.

ग़ौरतलब है कि बोर्ड और निगमों के अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस और जनता दल (एस) में काफ़ी दिनों से मतभेद चल रहा था.

224 सदस्यों वाली कर्नाटक विधानसभा में सबसे बड़ा दल भाजपा है जिसके 79 सदस्य जीतकर आए थे. जेडीएस के पास 59 विधायक थे जिसमें से, कहा जा रहा है कि 46 विधायक कुमारस्वामी के साथ हैं. बाक़ी सिद्धारमैया के साथ हैं. कांग्रेस के 64 विधायक हैं. जबकि 22 अन्य हैं.