सोमवार, 16 जनवरी, 2006 को 13:45 GMT तक के समाचार
इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी को लेकर जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अब भारतीय जाँच एजेंसी सीबीआई केंद्र सरकार के बचाव में सामने आई है.
सीबीआई ने कहा है कि क्वात्रोकी के बैंक खाते खोलने के मामले से सरकार का कोई संबंध नहीं है.
सीबीआई के अनुसार अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल बी दत्ता को लंदन भेजने का फ़ैसला सीबीआई का था न कि केंद्रीय क़ानून मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय का.
उल्लेखनीय है कि भाजपा ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज और कार्मिक मामलों के मंत्री सुरेश पचौरी ने ओत्तावियो क्वात्रोकी को क्लीनचिट दे दी है.
मगर सीबीआई ने साफ़ कहा है कि क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सीबीआई की ओर से जारी रेडकॉर्नर नोटिस अभी भी जारी है.
लेकिन सीबीआई ने इस जानकारी से इंकार कर दिया कि क्या खोले गए खातों से पैसे निकाल लिए गए हैं. एजेंसी के प्रवक्ता ने बार-बार कहा कि उन्होंने इसके बारे में जानकारी मँगवाई है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीआई से कहा है कि ओत्तावियो क्वात्रोकी के बैंक खाते फिर से सील रखने के लिए क़दम उठाएँ.
इस बीच भारत की स्वीकृति और लंदन में हाईकोर्ट के आदेशों से ओत्तावियो क्वात्रोकी के बैंक खाते खोल दिए गए हैं.
इस फ़ैसले के बाद क्वात्रोकी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि चूँकि उनके ख़िलाफ़ सीबीआई कोई सबूत नहीं जुटा पाई है, इसलिए इस मामले को बंद करना न्यायोचित होगा.
मामला पलटा
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और विपक्षी दलों के शोर-शराबे के बीच सीबीआई ने आनन फ़ानन में एक पत्रकारवार्ता बुलवाई.
इस पत्रकारवार्ता में सीबीआई के प्रवक्ता एके मजुमदार ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बी दत्ता को लंदन के हाईकोर्ट के सामने पक्ष रखने के लिए भेजने का फ़ैसला सीबीआई का अपना फ़ैसला था.
उन्होंने कहा, "इस फ़ैसले से न तो केंद्रीय क़ानून मंत्रालय का कोई लेना देना है न कार्मिक मंत्रालय का."
उन्होंने बताया कि जब सीबीआई ने दत्ता को क़ानूनी पक्ष रखने के लिए भेजने का फ़ैसला किया गया तो सीबीआई ने इसकी अनुमति के लिए पहले तो कार्मिक मंत्रालय को लिखा फिर दत्ता की नियुक्ति के लिए केंद्रीय विधि मंत्रालय से अनुमति माँगी.
सीबीआई प्रवक्ता का कहना था कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बी दत्ता अपने साथ अपने एक सहायक को भी साथ ले जाना चाहते थे लेकिन मंत्रालय से इसकी अनुमति नहीं मिली.
पैसों के बारे में सबूत नहीं
सीबीआई प्रवक्ता मजूमदार ने विस्तार से बताया कि लंदन के जिन बैंक खातों को सील किया गया था उन खातों में जमा पैसे के बारे में सीबीआई ये सबूत नहीं जुटा पाई कि इसका बोफ़ोर्स दलाली से कोई संबंध है.
उन्होंने बताया कि स्विट्ज़रलैंड के जिस बैंक से ये पैसा आया था उस बैंक ने इसका हिसाब देने में असमर्थता जता दी थी क्योंकि ये मामला बहुत पुराना था.
सीबीआई का कहना था कि ब्रितानी न्यायालय ने सरकार से नहीं बल्कि सीबीआई से पूछा था कि इन पैसों के संबंध में क्या जानकारी है.
इसलिए सीबीआई की ओर से ब्रितानी न्यायालय को जवाब देने के लिए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल बी दत्ता को भेजा गया.
बार-बार पूछे गए इस सवाल का सीबीआई प्रवक्ता मजूमदार ने कोई जवाब नहीं दिया कि क्या दत्ता ने लंदन में अपनी सीमा से आगे जाकर कुछ कहा है.
उन्होंने इस बात का भी कोई जवाब नहीं दिया कि वे पिछले कुछ दिनों से क्यों चुप्पी साधे हुए थे.
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल, न्यायमूर्ति सीके ठक्कर और न्यायमूर्ति सीवी रवीन्द्रन के एक तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को सरकार और सीबीआई को निर्देश जारी किए हैं.
एक जनहित याचिका पर जारी इस निर्देश में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीआई से कहा है कि ओत्तावियो क्वात्रोकी के बैंक खाते फिर से सील रखने के लिए कदम उठाएँ.
और यदि खाते पहले ही खोल दिए गए हों तो सरकार और सीबीआई ये सुनिश्चित करें कि इस खाते से 23 जनवरी तक कोई पैसा न निकाला जाए.
इस बीच अदालत ने एक याचिका को भी विचारार्थ स्वीकार कर लिया है जिसमें कहा गया है कि क्वात्रोकी के दो खातों को फिर से सील कर देना चाहिए जिसमें 2003 से 26 करोड़ रुपए (10 लाख अमरीकी डॉलर और 30 लाख यूरो) सील किए हुए थे.