बुधवार, 05 जुलाई, 2006 को 09:59 GMT तक के समाचार
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने असम में बिना मुक़दमा 54 साल जेल में बिताने वाले एक ग्रामीण को तीन लाख रुपए का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है.
पिछले वर्ष मचांग लालुंग को बिना मुक़दमे के 54 वर्ष तक जेल में रहने के बाद रिहा किया गया था.
अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस संबंध में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए असम सरकार को आदेश दिया है वह लालुंग को तीन लाख रूपए का मुआवज़ा दे.
सरकार ने इस संबंध में जाँच के लिए दो सदस्यों की एक समिति गठित कर दी है.
ऐसी संभावना है कि ये समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी.
54 साल
गोहाटी से 64 किलोमीटर दूर सिल्सांग गाँव के निवासी 77 वर्षीय मचांग लालुंग को 1951 में गिरफ़्तार किया गया था.
पुलिस के अनुसार उन्हें "गंभीर नुक़सान पहुँचाने के लिए" पकड़ा गया था.
इस अपराध के लिए आमतौर पर 10 साल की सज़ा दी जाती है.
लेकिन पुलिस ने बताया कि मचांग लालुंग पर लगाए गए आरोप का कोई सुबूत नहीं मिलने के बाद उन्हें गिरफ़्तारी के साल भर बाद एक मनोरोग केंद्र में भेज दिया गया.
1967 में उस मनोरोग केंद्र के अधिकारियों ने मचांग को स्वस्थ घोषित करते हुए कहा कि वे उन्हें रिहा करना चाहते हैं.
लेकिन पुलिस ने उन्हें रिहा करने के बजाय दूसरी जेल में भेज दिया.
फिर वर्ष 2003 में स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में गुहार लगाई जिसने तत्काल इसपर कार्रवाई करते हुए मचांग की रिहाई की माँग की.
इसके बाद पिछले वर्ष जुलाई में मचांग को एक रूपए के निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया.