शनिवार, 07 जनवरी, 2006 को 00:23 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
चौथा प्रवासी भारतीय दिवस इस बार दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में शनिवार से शुरू हो रहा है. जिसमें खाड़ी में काम कर रहे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
इसका उदघाटन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे और समापन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम प्रवासी भारतीयों को सम्मानित कर करेंगे.
इसमें प्रवासी भारतीयों के साथ 'ज्ञान की साझेदारी' पर विशेष बल दिया जाएगा. सम्मेलन में लगभग 1200 प्रवासी भारतीय हिस्सा ले रहे हैं.
इसके अलावा लगभग 12 प्रदेशों के मुख्यमंत्री सीधे प्रवासी भारतीयों से संवाद करेंगे और उनके सामने अपने प्रस्ताव रखेंगे और प्रवासी भारतीयों के सुझावों को ग़ौर से सुनेंगे. इसमें बिहार के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं.
प्रवासी भारतीय मंत्रालय के मंत्री ऑस्कर फ़र्नांडिस ने कहा कि बड़ी संख्या में आंध्र प्रदेश के लोग भी विदेशों में हैं. इस दृष्टि से हैदराबाद में इसका आयोजन महत्वपूर्ण है.
उनका कहना था कि इस सम्मेलन में खाड़ी में काम कर रहे लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके अलावा भारत की ज्ञान शाक्ति और शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं जैसे विषयों पर विशेष रूप से चर्चा होगी.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान हम आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत करेंगे और कैसे हम उन पर कार्य कर सकते हैं.
पूर्व सम्मेलन
प्रवासी भारतीयों को लेकर राजधानी दिल्ली में जनवरी 2003 में पहला प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हुआ था.
इसके बाद का सम्मेलन भी दिल्ली में हुआ लेकिन तीसरे सम्मेलन का आयोजन मुंबई में किया गया.
इस कार्यक्रम में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय मूल के लोगों को दोहरी नागरिकता देने की बात कही थी.
इसके अलावा खाड़ी देशों में भारतीय श्रमिकों की स्थिति पर चिंता को देखते हुए बीमा योजना और कल्याण कोष के गठन की भी बात हुई थी.
दुनिया भर में भारतीय मूल के क़रीब दो करोड़ लोग रहते हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग 19वीं शताब्दी में आर्थिक कारणों से भारत छोड़ कर गए थे. आज दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा होगा जहाँ भारतीय न रहते हों.
सबसे ज़्यादा भारतीय खाड़ी के देशों में रहते हैं. इनमें से लगभग आधे लोग केवल केरल से आते हैं. भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या मेहनत-मज़दूरी करती है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अमरीका मे लगभग 17 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं. ऑस्कर फर्नांडिस ने बताया कि अमरीका में लगभग 40 हज़ार भारतीय डॉक्टर हैं.
अमरीका में रहनेवाले भारतीय पढ़े-लिखे, जागरूक और बहुत ज़्यादा कमाने वाले लोग हैं. पिछले कुछ सालों में ये लोग एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत के रूप में भी उभरे हैं.
इसके अलावा कनाडा और कैरीबियाई द्वीप में भारतीयों की बड़ी संख्या है. ब्रिटेन में भारतीय मूल के क़रीब दस लाख लोग हैं और ये आर्थिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं.