शनिवार, 07 जनवरी, 2006 को 13:21 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
विदेशों में रहने वाले भारतीयों का दोहरी नागरिकता देने की शुरूआत करते हु प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी नागरिक निवरुति राय को पहला प्रवासी भारतीय नागरिकता कार्ड प्रदान किया है.
निवरुति राय पेशे से कंप्यूटर प्रोफ़ैशनल हैं और इस समय इंटेल के बंगलौर दफ़्तर में काम करती हैं.
बीबीसी से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि सितंबर 2005 में वह भारत आईं थीं तो उन्होंने सोचा भी नहीं था कि वो पहली शख्स होंगी जिसे प्रवासी भारतीय कार्ड दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि उनका सपना सच हो गया है और वो अब एक तरह से दो देशों की नागरिक बन गईं हैं. उनके अलावा उनके दोनों बच्चों को भी यह सुविधा हासिल हो गई है.
वह बताती हैं कि इसके कई फ़ायदे हैं. अन्यथा हर तीन महीने पर विदेशी नागरिक पंजीकरण कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते.
उनका कहना था कि इसका एक फ़ायदा तो यह है कि अब वो एक ही वक़्त में दो देशों के फ़ायदों के बारे में सोच सकती हैं.
राय कहती हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और उसमें हम जैसे प्रवासी भारतीय भी हिस्सेदार बन सकेंगे.
निवरुति के पति सुनीत त्यागी भी इंटेल में इंजीनियर हैं और इस मौक़े पर पूरा परिवार हैदराबाद आया हुआ है.
जड़ें यहीं हैं
निवरुति राय गोरखपुर में पैदा हुईं और लखनऊ में पली बढ़ीं. अब भी उनके माता-पिता लखनऊ में रहते हैं.
लखनऊ का नाम आते ही उनकी आखों में एक विशेष चमक आ जाती है. वह कहती हैं कि लखनऊ दुनिया की सबसे अच्छी जगह है.
उनके पति सुनीत त्यागी प्रवासी भारतीय दिवस को महत्वपूर्ण मानते हैं. उनका मानना है कि इनसे देश की उन्नति के बारे में सोचने में मदद मिलती है.
साथ ही ऐसे क़दमों से प्रवासी भारतीयों की ज़िदगी आसान हो जाएगी नहीं अन्यथा उन्हें बैंक खाता खोलने से लेकर पंजीकरण तक की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.