भारत के उड़ीसा राज्य में प्रदर्शनकारी आदिवासियों ने सोमवार को पुलिस की गोलियों का शिकार हुए चार लोगों के शव तो लौटा दिए हैं लेकिन उन्होंने इलाक़े की प्रमुख सड़क को जाम कर रखा है.
सोमवार सुबह उड़ीसा के जाजपुर ज़िले में स्थित कलिंगनगर में एक स्टील प्लांट के निर्माण का विरोध कर रहे आदिवासियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में एक पुलिसकर्मी समेत 13 लोग मारे गए थे.
घटना के बाद से ही आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने मारे गए लोगों में से चार शवों को लेकर डुबरी-चंडिकोल मार्ग को जाम कर रखा था.
मंगलवार को उन्होंने चारों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए प्रशासन को दे दिया लेकिन जाम ख़त्म करने के लिए तैयार नहीं हुए.
प्रदर्शनकारी हर मृतक के रिश्तेदार को 10 लाख रुपए का मुआवज़ा देने और और जाजपुर के ज़िला मजिस्ट्रेट और ज़िला पुलिस प्रमुख को निलंबित करने की माँग कर रहे थे.
जाम का असर
डुबरी-चंडिकोल इस इलाक़े की सबसे प्रमुख सड़क है और इसपर जाम के कारण इलाक़े का यातायात प्रभावित हुआ है और पास के ज़िले से कच्चे लोहे को ले जाने में दिक्कत हो रही है.
इस बीच विपक्षी पार्टियों ने आदिवासियों पर गोली चलाए जाने के विरोध में सात जनवरी को पूरे राज्य में बंद का आह्ववान किया है.
जिस स्टील प्लांट को लेकर हिंसा हुई वह भारत की अग्रणी स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील का कारखाना है जिसे लेकर पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ था.
कुछ महीने पहले भी प्रदर्शनकारियों ने प्लांट के उदघाटन के समय हमला कर दिया था और तब भी पुलिस को गोली चलानी पड़ी थी. पुलिस ने तब कई आदिवासियों को गिरफ़्तार किया था.