बुधवार, 28 दिसंबर, 2005 को 15:21 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में मदरसों ने विदेशी छात्रों को 31 दिसंबर तक निकाले जाने की समयसीमा का पालन करने से मना कर दिया है.
इस साल जुलाई में लंदन में बम हमले हुए थे और दिखाया गया था कि इन धमाकों के लिए ज़िम्मेदार एक आत्मघाती हमलावर पाकिस्तान के किसी मदरसे में आया था.
इसके बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मदरसों से विदेशी छात्रों को निकाले जाने का आदेश दिया था.
लेकिन करीब 12 हज़ार मदरसों के संगठन इत्तहाद ए तंज़ीम उल मदारिस ने कहा है कि ये आदेश अवैध, पक्षपातपूर्ण और ग़ैर इस्लामी है.
इत्तहाद ए तंज़ीम उल मदारिस का कहना है कि विदेशी छात्रों के पास वैध दस्तावेज़ हैं और किसी भी छात्र की आपराधिक या चरमपंथी गतिविधि में तलाश नहीं है.
संगठन का कहना है कि मदरसे छोड़ने के आदेश के बाद करीब 700 छात्र जा चुके हैं जबकि 700 छात्र अभी भी मदरसों में पढ़ाई कर रहे हैं.
लेकिन पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री आफ़ताब शेरपाओ ने बीबीसी को बताया कि अब तक करीब 65 फ़ीसदी छात्रों को निर्वासित किया जा चुका है.
इत्तहाद ए तंज़ीम उल मदारिस के नेता हनीफ़ जालंधरी ने कहा है कि मदरसे इस्लामाबाद में एक जनवरी को सम्मेलन करेंगे. उन्होंने बताया कि सम्मेलन में छात्रों के मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक दलों के बीच सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की जाएगी.
हनीफ़ जालंधरी ने कहा कि अगर सरकार ने छात्रों को निकाले जाने का आदेश वापस नहीं लिया तो देश भर में अभियान चलाया जाएगा.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर विदेशी छात्रों को दूसरे संस्थानों में दाखिला लेने की इजाज़त है तो मदरसों में क्यों नहीं.
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री ने कहा है कि सरकार को 31 दिसंबर की समयसीमा भले ही कुछ दिन के लिए आगे बढ़ानी पड़ सकती है लेकिन सरकार छात्रों को निकाले जाने आदेश को लागू ज़रूर करेगी.