बुधवार, 28 दिसंबर, 2005 को 12:59 GMT तक के समाचार
विनोद वर्मा
बीबीसी संवाददाता, मुंबई से
भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच दूरियाँ इस बीच लगातार बढ़ती दिख रही हैं लेकिन इस दूरी को पाटने के प्रयास भी शुरु हो गए हैं.
माना जा रहा था कि लालकृष्ण आडवाणी के अध्यक्ष पद से विदा होने के बाद से ये शुरु होगा लेकिन इसकी शुरुआत उनके रहते-रहते ही हो गई है.
एक तो रजत जयंती की शुरुआत के दिन ही एक कार्यक्रम में आडवाणी ने संघ के सहसरकार्यवाह मदनदास देवी की उपस्थिति में यह संकेत देने की कोशिश की थी कि संघ के भरोसे ही भाजपा का अस्तित्व है.
इसके बाद आडवानी ने राष्ट्रीय परिषद की बैठक शुरु करते हुए जो भाषण दिया उसमें भी उन्होंने संघ की जमकर तारीफ़ की. वैचारिक मतभेद और दखलंदाज़ी की बात वे शायद भूल गए या फिर जानबूझकर याद नहीं किया.
वहीँ इससे पहले हुई दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ‘गुरु गोलवलकर’ यानी मधुकर गोलवलकर और श्यामाप्रसाद मुखर्जी के आदमकद तस्वीर लगाई गई थी.
पता नहीं इसका कारण मदनदास देवी की बैठक में उपस्थिति थी या फिर भाजपा संघ के प्रति अपनी श्रद्धा ज़ाहिर करना चाहती थी लेकिन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के एक पुराने सदस्य ने कहा कि वो ऐसा पहली बार देख रहे हैं.
इसके बाद पार्टी के नेता ये बताना नहीं भूले कि पार्टी के नेता गोलवलर की शताब्दी मनाने जा रही है.
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मीडिया कवरेज
संजय जोशी के विवादास्पद सीडी के आने से पहले तक मुंबई के अखबारों को देखकर लग रहा था मानों भाजपा के रजत जयंती समारोह में अख़बारों की कोई रुचि नहीं है.
जिस दिन रजत जयंती समारोह शुरु हुए उस दिन ज़्यादातर अख़बारों के पहले पेज को देखकर नहीं लगता था कि इसी शहर में कोई बड़ा समारोह हो रहा है.
हाल ये था कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीरें तो छोटी-छोटी छपी थीं और बड़ी तस्वीर हेमा मालिनी की छपी थीं जिन्होंने ‘ऊँ’ लिखी हुई साड़ी पहन रखी थी.
अख़बारों के इस रवैये से स्वाभाविक से और उससे भी अधिक अपने नेताओं से नाराज़ एक भाजपा सांसद ने टिप्पणी की, “हेमामालिनी को ही अध्यक्ष बना देना भी ग़लत नहीं होगा.”
वैसे आकर्षण का केंद्र सिर्फ़ हेमा मालिनी नहीं थीं. विद्रोही नेता और बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा भी थे.
अलबत्ता ‘सास भी कभी बहू थी’ की बहू तुलसी यानी स्मृति ईरानी को इस बार मीडिया ने वैसा भाव नहीं दिया जैसा पिछले लोकसभा चुनाव के समय दिल्ली में दिया था.
वैसे संजय जोशी कांड ने भाजपा की मीडिया कवरेज की शिकायतों को काफ़ी हद तक दूर कर दिया.
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व्यंजन सूची
जब आयोजन प्रमोद महाजन का हो तो सब कुछ भव्य होता है.
लेकिन भाजपा के रजत जयंती समारोह में सब कुछ भव्य नहीं है. ख़ासकर भोजन तो बिलकुल भी नहीं.
रोटी, पूड़ी, एक सब्ज़ी, दाल और चावल. बस. दोनों वक़्त यही भोजन. मीडिया के लिए भी और कार्यकर्ताओं के लिए भी.
वैसे ख़बरें हैं कि रजत जयंती अधिवेशन के आयोजन पर पाँच करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं और इस आयोजन के तामझाम को लेकर संघ के मुखपत्र ‘ऑर्गेनाइज़र’ ने भी नाराज़गी जताई लेकिन भोजन सादा रखने की वजह प्रमोद महाजन ने बताई, पैसों की कमी.
वैसे महाराष्ट्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी कहा कि अतिवृष्टि और बाढ़ की वजह से जो नुक़सान हुआ है उसके कारण रजत जयंती समारोह को सादा रखा गया है.