गुरुवार, 22 दिसंबर, 2005 को 12:05 GMT तक के समाचार
फ़ैसल मोहम्मद अली
बीबीसी संवाददाता, भोपाल
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से ‘अज्ञातवास’ को पहुँच गए बाबूलाल गौर आजकल हिंदुओं के आराध्य देवता हनुमान में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
उनकी कुर्सी छिनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली उमा भारती जब राम-रोटी का जप करते भगवान राम की शरण में जा रही हैं, बाबूलाल गौड़ रामभक्त हनुमान पर वैज्ञानिक शोध करवाना चाहते हैं.
1974 से लगातार विधायक रहे और अब राज्य सरकार में उद्योग, वाणिज्य और गैस राहत मंत्री, गौर का कहना है कि रामायण-महाभारत जैसी धार्मिक पुस्तकों के किरदार महज़ काल्पनिक नहीं हैं.
गौर कहते हैं, "यह सिर्फ़ आस्था से जुड़ा सवाल नहीं है. इसके वैज्ञानिक पहलुओं पर शोध ज़रूरी है जो इस विषय पर एक नया प्रकाश टाल सकता है."
अपनी बातों को मध्यप्रदेश विज्ञान काँग्रेस के एक आयोजन में रखकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में वैज्ञानिक बिरादरी की राय की भी माँग की है.
अनूठे तर्क
मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में कार्यरत वैज्ञानिक संदीप गोयल कहते हैं, " इस बात पर वैज्ञानिक शोध होना ज़रूरी है. जब तक दोनों खोजों में हनुमान जैसे किरदारों की मौज़ूदगी का ऐतिहासिक पहलू सिद्ध नहीं होता, इसके वैज्ञानिक पहलू पर ख़ोज शुरू नहीं हो सकती."
बाबूलाल गौर ने हनुमान कैसे उड़ते थे जैसे विषय पर शोध के अलावा महाभारत के संजय कैसे घर बैठे युद्ध का आँखो देखा हाल बताते थे, मंत्रों में क्या शक्ति है और रामायण में बयान किया गया पुष्पक विमान कैसे उड़ता था, पर भी शोध की सलाह वैज्ञानिकों को दी है.
उन्होंने यह भी कहा कि ऋषि-मुनि भी एक तरह से वैज्ञानिक ही थे.
बाबूलाल गौर का कहना है कि उन्हें इस तरह के शोध का ख्याल टीवी पर रामायण और महाभारत सीरियल देखने के बाद आया था.
जब गौर से पूछा गया कि उन्होंने 15 महीनों तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान इस शोध परियोजना पर काम क्यों नहीं शुरू करवाया तो गौर की टिप्पणी थी, "तब मैं राज्य के विकास के कामों में लगा था."