मंगलवार, 20 दिसंबर, 2005 को 22:44 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार सिख समुदाय के किसी व्यक्ति को सैन्य अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है.
सिख समुदाय के हरचरन सिंह, सेना में भर्ती होने के लिए ज़रूरी आईएसएसबी यानी इंटर सर्विसिस सिलेक्शन बोर्ड की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं.
19 वर्षीय हरचरन का संबंध पाकिस्तान के ननकाना साहिब इलाक़े से है.
डॉन अख़बार के मुताबिक़ इस उपलब्धि पर हरचरन सिंह ने कहा,
“जब मुझे सेना के लिए चुने जाने की ख़बर मिली तो वो मेरी जिंदगी का सबसे सुखद लम्हा था. मैं उस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा हूँ, ऐसी उपलब्धि जो मेरे पूर्वज कभी हासिल नहीं कर सके.”
सिख समुदाय
सेना में चुने जाने की ख़बर को लेकर हरचरन के परिवार वाले भी फूले नहीं समा रहे.
बीबीसी को दिए गए साक्षात्कार में हरचरन सिंह के छोटे भाई सुरेंद्र सिंह ने कहा, “हम लोगों को कितनी खुशी हो रही है हम बयां नहीं कर सकते.”
सुरेंद्र ने बताया कि हरचरन बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में अच्छे थे.
जब ये पूछा गया कि हरचरन सेना में भर्ती क्यों होना चाहते थे तो सुरेंद्र ने बताया, “हरचरन को बचपन से ही बंदूकों का शौक था.”
सुरेंद्र ने कहा कि उनके परिवार की माली हालत भी अच्छी नहीं है.
हरचरन के भाई ने कहा कि सिख समुदाय के लिए नौकरियों के अवसर बेहद कम हैं. पर सुरेंद्र ने उम्मीद जताई कि हरचरन के सेना में चुने जाने से सिख समुदाय के दूसरे युवकों के लिए अब दरवाज़ा खुल जाएगा.
पीटीआई के मुताबिक़ हरचरन सिंह ने दूसरी बार आईएसएसबी की परीक्षा दी थी लेकिन सिख होने के चलते वे सेना के लिए चुने जाने को लेकर थोड़े आशंकित थे.
डॉन अख़बार ने लिखा है कि इससे पहले ईसाई समुदाय के लोग तो पाकिस्तानी सेना में काम करते रहे हैं लेकिन हिंदू या सिख समुदाय के लोगों की कभी भी सेना में भर्ती नहीं हुई.