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सोमवार, 19 दिसंबर, 2005 को 13:50 GMT तक के समाचार

'डब्ल्यूटीओ में भारत का रूख़ ग़लत'

भारत में सोमवार को वामदलों और तमाम समाजसेवी संगठनों ने हांगकांग सहमति पर भारतीय रुख़ को ग़लत और नाकामयाब बताते हुए कहा है कि इससे विश्व वयापार में एक बार फिर विकसित देशों को ही लाभ पहुँचेगा.

दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा, "भारत सरकार ने हांगकांग में हुई सहमति के स्तर पर ऐसा कुछ नहीं किया जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो सके और देश को लाभ पहुँचे."

उन्होंने कहा, "भारत सरकार ने जो रुख़ अपनाया है, वह हमारे देश के किसानों और अन्य विकासशील देशों के पक्ष में नहीं है. सरकार ने जो रुख़ अपनाया है, उस बाबत उन्हें जवाब देना पड़ेगा."
 हमने जो कहा था, हमें सरकार से जो अपेक्षा थी और जो हुआ है उसे देखकर हम कह सकते हैं कि सरकार आम लोगों और विकासशील देशों के हितों की रक्षा कर पाने में नाकामयाब रही है.
 
प्रकाश कारत, महासचिव-मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी

यह पूछे जाने पर कि क्या वामदलों ने विश्व व्यापार संगठन के सम्मेलन की शुरुआत से पहले सरकार से इस बाबत बातचीत की थी, उन्होंने बताया कि हांगकांग में भारत की हिस्सेदारी से पहले दो बैठकों में वामदलों ने विश्व व्यापार संगठन में भारत के रुख़ के बारे में चर्चा की थी.

उन्होंने कहा, "हमने जो कहा था, हमें सरकार से जो अपेक्षा थी और जो हुआ है उसे देखकर हम कह सकते हैं कि सरकार किसानों और विकासशील देशों के हितों की रक्षा कर पाने में नाकामयाब रही है."

जानी मानी समाजसेविका वंदना शिवा ने भी सरकार के कदम को अपर्याप्त बताते हुए कहा, विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पास्कल लैमी का कहना है कि हांकांग की बैठक के बाद विश्व व्यापार संबंधी सुधार फिर से रास्ते पर आ गए हैं और अब विकासशील देशों को लाभ हुआ है.

समझौता

ग़ौरतलब है कि हांगकांग में छह दिन चली वार्ताओं के बाद विकसित देश इस बात पर राज़ी हुए हैं कि अगर अगले एक साल में व्यापार मामलों पर एक बड़ा समझौता हो जाता है तो वो 2013 तक कृषि उत्पादों पर दी जाने वाली सब्सिडी समाप्त कर देंगे.

हालांकि बीबीसी संवाददाता के मुताबिक यह समझौता बड़ी उपलब्धि नहीं कहा जा सकता क्योंकि अगले कुछ हफ्तों में वार्ताओं का कठिन दौर शुरु हो जाएगा.

विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक पास्कल लैमी का कहना है कि हांगकांग की बैठक के बाद विश्व व्यापार संबंधी सुधार फिर से रास्ते पर आ गए हैं और अब विकासशील देशों को लाभ हुआ है.

इसी के साथ मुक्त व्यापार के लिए बातचीत के दोहा दौर को आगे भी जारी रखने की राह में कोई अवरोध नहीं रह गया है.

उल्लेखनीय है कि हाँगकाँग से पहले 1999 में सिएटल में और 2003 में कान्कुन में डब्ल्यूटीओ की मंत्रीस्तरीय बातचीत नाकाम रही थी.