रविवार, 18 दिसंबर, 2005 को 00:21 GMT तक के समाचार
श्रीलंका में सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच संघर्ष विराम पर नज़र रखने वाले पर्यवेक्षकों ने तमिल विद्रोहियो पर इस सप्ताह संघर्ष विराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है.
श्रीलंका की वायु सेना के एक हेलिकॉप्टर पर गोलीबारी के बाद पर्यवेक्षकों ने तमिल विद्रोहियों से ऐसी कार्रवाइयों से दूर ही रहने के लिए कहा है. तमिल विद्रोहियों ने इस तरह के किसी हमले की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार किया है.
उन्होंने एशिया में किसी तटस्थ स्थल पर शांति वार्ता में हिस्सा लेने जाने से भी इनकार किया है.
श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही हिंसा की गतिविधियाँ काफ़ी तेज़ हो गई हैं.
'गंभीर नतीजे'
रूस में बना एमआई-17 हेलिकॉप्टर पूर्वी अमपारा के एक गाँव से जब इटली की विदेश उपमंत्री मारगरिटा बॉनिवर को लेकर लौट रहा था तब उस पर गोलियाँ चलाई गईं.
हेलिकॉप्टर को मामूली नुक़सान हुआ और वह सुरक्षित अमपारा लौट गया.
नॉर्वे के नेतृत्व वाले पर्यवेक्षकों ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा, "हेलिकॉप्टर पर जिस इलाक़े से गोलियाँ चलाई गईं वह एलटीटीई के नियंत्रण वाला क्षेत्र हैं इसलिए एलटीटीई को हमले की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."
बयान में कहा गया है, "इस तरह की हरक़तों के गंभीर नतीजे हो सकते हैं और संघर्ष विराम को नुक़सान पहुँच सकता है."
मगर एलटीटीई की राजनीतिक शाखा के प्रमुख एसपी तमिलसेल्वन ने बीबीसी की तमिल सेवा को दिए एक साक्षात्कार में इस बात पर ज़ोर दिया है कि तमिल विद्रोहियों का इस हमले से कोई लेना देना नहीं है.
इससे पहले श्रीलंका सरकार ने अपनी उस माँग में कुछ नरमी बरती है कि अगर शांति वार्ता शुरू होनी है तो वह श्रीलंका की ज़मीन पर ही होनी चाहिए.
सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार वार्ता किसी भी तटस्थ एशियाई देश में हो सकती है.
मगर तमिलसेल्वन ने कहा है कि इस तरह की कोई भी बातचीत यूरोप में ही हो सकती है.
तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच वर्ष 2002 से ही संघर्ष विराम चल रहा है मगर शांति वार्ता अप्रैल 2003 से स्थगित चल रही है.