शुक्रवार, 16 दिसंबर, 2005 को 17:12 GMT तक के समाचार
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में सक्रिय नगा आदिवासी संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल ने शुक्रवार को दिल्ली में कहा कि वे ऐसा कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें उनके क़बीलों वाले इलाक़ों को एकीकृत नहीं किया जाएगा.
संगठन ने कहा है कि नगा लोग पर भारत सरकार और विभिन्न नगा संगठनों के बीच आठ साल से चल रही शांति वार्ता से 'आमतौर पर असंतुष्ट' हैं.
इस बीच इस बातचीत का अगला दौर भारत सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड के प्रतिनिधियों के बीच बैंकाक में शुक्रवार को शुरू हुआ है.
इससे पहले दोनों पक्षों के बीच पिछले क़रीब डेढ़ साल के दौरान बातचीत के बारह दौर हो चुके हैं लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है.
इसी मौक़े पर यूनाइटेड नगा काउंसिल के अध्यक्ष पी मोदोली ने दिल्ली में एक पत्रकार सम्मेलन में कहा, "नगा समस्या का कोई भी सम्मानजनक समाधान नगा इलाक़ों के एकीकरण के साथ शुरू होना चाहिए."
यह काउंसिल मणिपुर के 29 क़बीलों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है.
काउंसिल के अध्यक्ष पी मोदोली ने शुक्रवार को कहा कि लोगों में यह राय बन रही है कि अब युद्ध विराम को समाप्त कर देना चाहिए.
यह काउंसिल हालाँकि मणिपुर का संगठन है लेकिन एक ऐसा वृहद नगालैंड बनाना चाहती है जिसमें मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश के सभी नगा बहुल इलाक़े शामिल हों.
मोदोली ने कहा कि एनएससीएन के साथ बातचीत के मौजूदा दौर के बाद नगाओं के विभिन्न संगठनों के राजनीतिक धड़े युद्ध विराम की समीक्षा करेंगे.
भारत सरकार और नगाओं के विभिन्न संगठनों के बीच मौजूदा युद्ध विराम 31 जनवरी 2006 को समाप्त होना है.
हालाँकि मोदोली ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के साथ उनकी बातचीत "सार्थक" रही है और वे किसी समाधान को लेकर आशान्वित हैं.
काउंसिल ने केंद्र सरकार के कई मंत्रियों के साथ भी पिछले सप्ताह मुलाक़ातें की थीं.