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शुक्रवार, 16 दिसंबर, 2005 को 23:00 GMT तक के समाचार

बर्मा पर सुरक्षा परिषद की बैठक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बर्मा के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण बैठक की है. संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत ने बैठक के बाद बताया कि सभी सदस्यों ने माना है कि बर्मा में स्थिति चिंताजनक है

लेकिन इस बात पर मतभेद थे कि बर्मा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा बन गया है.

सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी से बर्मा के मसले पर पूरी जानकारी ली और उसके बाद बंद कमरे में बातचीत की.

बर्मा सुरक्षा परिषद के एजेंडे पर नहीं है. इस कारण न तो बर्मा के मुद्दे पर लगातार बातचीत हो सकती है और न ही इस मसले पर प्रस्ताव पारित हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बर्मा अब तक सुरक्षा परिषद के एजेंडे पर आने से बचता रहा है. लेकिन इस बार हुई वार्ता काफ़ी महत्वपूर्ण है और इसमें बर्मा सरकार के कामकाज पर टिप्पणी की गई है.

बर्मा के हालात

संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक मामलों के वरिष्ठ अधिकारी इब्राहिम गांबरी ने सुरक्षा परिषद के सदस्यों को बर्मा मामले की पूरी जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में सुधार की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं और अभी भी वहाँ हज़ारों राजनीतिक क़ैदी बंद हैं.

पिछले महीने ही बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सांग सू ची को घर में ही नज़रबंद रखने के फ़ैसले को और आगे बढ़ा दिया गया था.

गांबरी ने यह भी बताया कि बर्मा में एड्स का प्रकोप तेज़ी से बढ़ रहा है. बच्चों में कुपोषण फैल रहा है और शिक्षा के अवसर कम होते जा रहे हैं.

सुरक्षा परिषद की बैठक में शामिल हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि बर्मा पर जानकारी के बाद अब सुरक्षा परिषद को थोड़ा समय चाहिए ताकि वो इस पर गंभीरता से सोच विचार कर सके.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत को पिछले दो वर्षों से बर्मा जाने की अनुमति नहीं दी गई है.

बैठक में अमरीका और ब्रिटेन का कहना था कि बर्मा के मसले को सुरक्षा परिषद के एजेंडे में शामिल किया जाए.

इन देशों का तर्क था कि बर्मा में मादक पदार्थों की तस्करी और शरणार्थियों की बढ़ती समस्या ने, बर्मा को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बना दिया है.

हालांकि अन्य देशों का कहना था कि ये बातें बर्मा का आंतरिक मसला है.