बुधवार, 14 दिसंबर, 2005 को 14:09 GMT तक के समाचार
गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों में 11 लोगों की मौत के लिए 11 लोगों को आजन्म कारावास की सज़ा सुनाई गई है.
मारे जानेवाले लोगों में चार महिलाएँ और पाँच बच्चे शामिल थे. उन्हें हिंदू भीड़ ने एक कुएँ में फेंक दिया था.
इस हिंसा की शुरुआत तब हुई जब गोधरा में हिंदू तीर्थयात्रियों पर हमला किया गया जिसमें 60 यात्री मारे गए थे. आरोप लगा था कि इसमें मुसलमान दंगाइयों का हाथ था.
इसके बाद पूरे गुजरात में दंगे भड़क उठे जिसमें लगभग एक हज़ार लोग मारे गए. उसमें अधिकांश मुसलमान थे.
स्वतंत्र सूत्रों का कहना है कि मारे जानेवाले लोगों की संख्या दो हज़ार तक हो सकती है.
बुधवार को गोधरा की विशेष अदालत ने ये फ़ैसला सुनाया. इस दौरान 80 से अधिक गवाह पेश हुए.
बचाव पक्ष के वकील नूर मोहम्मद शेख ने बीबीसी को बताया कि 21 संदिग्ध लोगों को इस मामले में छोड़ दिया गया.
बीबीसी संवाददाता राजीव खन्ना का कहना है कि अदालत का फ़ैसला बेहद अहम है क्योंकि कुछेक मामले ही अदालत तक पहुँचे हैं और गिने चुने मामलों में ही सज़ा हो पाई है.
भाजपा की गुजरात सरकार पर आरोप लगा था कि उसने हिंसा रोकने और दंगाइयों को सज़ा दिलवाने के बहुत कम प्रयास किए.