सोमवार, 12 दिसंबर, 2005 को 20:28 GMT तक के समाचार
बंबई मुंबई हो गया, मद्रास बना चेन्नई और कलकत्ता हो गया कोलकाता और अब बारी है बंगलौर की जो अब बन जाएगा बेंगालुरू.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री धरम सिंह ने घोषणा की है कि प्रदेश की राजधानी बंगलौर का नाम बदलने के लिए क़दम उठाया जाएगा.
नाम बदलने के पीछे कारण ये बताया जा रहा है कि बंगलौर नाम अंग्रेज़ों का दिया हुआ नाम है.
कहा जा रहा है कि बेंगालुरू - शहर के मूल नाम बेंडा काल उरू से अधिक मिलता है.
कोई अभियान नहीं
वैसे जिस तरह से बंबई और मद्रास में नाम बदलने के लिए स्थानीय लोगों ने एक अभियान शुरू किया था उस तरह बंगलौर में कोई अभियान नहीं दिखाई दिया.
स्थानीय राष्ट्रवादी लोग प्रदेश में कन्नड़ भाषी लोगों को नौकरियों में बढ़ावा देने, सरकारी कार्यालयों और दूकानों में कन्नड़ के प्रयोग जैसी माँग करते रहे थे.
पिछले वर्ष उन्होंने केंद्र सरकार से कन्नड़ भाषा को विशेष भाषा का दर्जा देने की भी माँग की थी.
प्रदेश में कन्नड़भाषी लोगों के लिए अभियान चलानेवाली कन्नड़ रक्षिणा वेदिके नामक पार्टी के प्रतिनिधि नाम बदलने से तो खुश हैं लेकिन नए नाम से नहीं.
पार्टी के नेता नारायण गौड़ा कहते हैं,"हम निर्णय का स्वागत करते हैं लेकिन शहर का नाम बेंडाकालुरू होना चाहिए था".
बेंडा काल उरू
दरअसल शहर का नाम मूल रूप से बेंडा काल उरू से निकला है जिसका अर्थ होता है उबले हुए सेम(बीन्स) का शहर.
स्थानीय लोगों में ऐसी मान्यता है कि पुराने दिनों में एक राजा वीर बल्लाल अभी के बंगलौर के उत्तरी इलाक़े में शिकार करते हुए भटक गए.
कई घंटों तक भूखे-प्यासे रहने के बाद उन्हें एक वृद्ध महिला की झोपड़ी मिली जिसने उनको उबले हुए सेम खिलाए.
खुश होकर राजा ने उस जगह का नाम बेंडा काल उरू रख दिया यानी उबले हुए सेम.