शुक्रवार, 09 दिसंबर, 2005 को 16:45 GMT तक के समाचार
भारत में वेश्यावृत्ति को रोकने के लिए प्रस्तावित क़ानूनी परिवर्तनों का विरोध करने के लिए देश भर से आई यौनकर्मियों ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन किया.
यौनकर्मियों के एक प्रवक्ता ने कहा कि 49 साल पुराने इस क़ानून में अब बदलाव की पेशकश की गई है कि वेश्यालय में यौन संबंध बनाने के इरादे से जो भी लोग पाए जाएंगे उन्हें 'दंडित' किया जाएगा.
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा कुछ और भी परिवर्तन किए जा रहे हैं. यौनकर्मियों का कहना है कि इस तरह की पाबंदियों से उनकी जीविका मुश्किल हो जाएगी.
देश के यौनकर्मियों ने इससे पहले ही माँग की थी कि उनके पेशे को क़ानूनी मान्यता दी जाए, उनका कहना है कि यह उनके बच्चों के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
आंध्र प्रदेश से आई एक यौनकर्मी सत्यबती ने कहा, "अगर वे हमारे ग्राहकों को ही दंडित करना शुरू कर देंगे तो हमारी रोज़ी-रोटी कैसे चलेगी. यह प्रस्ताव अन्यायपूर्ण है."
यौनकर्मियों के कल्याण के लिए काम करने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति टंडन ने कहा कि हालाँकि केंद्र सरकार ने अभी इन परिवर्तनों की घोषणा नहीं की है लेकिन सरकार की तरफ़ से कुछ विवरण दिया गया है जिसमें प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी गई है.
तृप्ति टंडन ने कि क़ानून में प्रस्तावित बदलावों से पुलिस को वेश्यालयों पर छापा मारने के लिए और ज़्यादा अधिकार मिल जाएंगे. टंडन ने कहा कि इन बदलावों में उन लोगों के लिए भी दंड की व्यवस्था की जा रही है कि जो वेश्यालय को चलाते हैं या चलाने में मदद करते हैं.
दो लाख यौनकर्मियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले एक राष्टीय नेटवर्क इन बदलावों का विरोध कर रहा है. नेटवर्क का कहना है कि इन बदलावों से पुलिस के हाथों और उत्पीड़न को बढ़ावा मिलेगा.
इस संगठन ने कहा है कि यौनकर्मियों के पेशे को क़ानूनी मान्यता दिलाने के लिए वह अपना अभियान और तेज़ करेगा.
दूसरी तरफ़ कुछ महिलावादी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यौनकर्मियों को पहले धीरे-धीरे अपने लिए सामान्य नागरिक अधिकार हासिल करने की तरफ़ बढ़ना चाहिए और फिर अपने पेशे को क़ानूनी मान्यता दिलाने के लिए मुहिम छेड़नी चाहिए.