गुरुवार, 08 दिसंबर, 2005 को 16:14 GMT तक के समाचार
ईपीएफ़ की दरों को घटाने के निर्णय पर वामदलों ने सदन के दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया.
वामदलों ने केंद्रीय श्रम मंत्री चंद्रशेखर श्रम मंत्री के इस फ़ैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में किसी भी घोषणा से पहले प्रधानमंत्री से चर्चा करना तय हुआ था.
वामदलों ने कहा कि चर्चा के बग़ैर ईपीएफ़ के बारे में घोषणा करना ग़लत है.
वामदलों के सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि जब सदन का शीतकालीन सत्र चल रहा है तो ऐसे में मंत्री का सदन के बाहर कोई घोषणा करना और अपनी घोषणा के बारे में सदन में कोई स्पष्टीकरण देने के लिए उपस्थित न होना बिल्कुल ग़लत है.
सांसद और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो की सदस्य, वृंदा कारत ने कहा, "श्रममंत्री को तो यह अधिकार ही नहीं है कि वह इस तरह का वक्तव्य दें क्योंकि इसपर प्रधानमंत्री के साथ चर्चा होनी तय हुई थी."
ग़ौरतलब है कि भारत में वर्ष 2005-06 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज़ दर घटाने का फ़ैसला किया गया है जिसके बाद ईपीएफ़ पर 9.5 प्रतिशत की जगह 8.5 प्रतिशत ब्याज़ दिया जाएगा.
घाटा
बुधवार को दिल्ली में एक बैठक के बाद केंद्रीय श्रम मंत्री चंद्रशेखर राव ने कहा था कि साढ़े आठ प्रतिशत का ब्याज़ देने से हमें लगभग 370 करोड़ रूपए की अतिरिक्त आवश्यकता होगी.
उन्होंने कहा," इस अतिरिक्त बोझ के कारण सरकारी ख़ज़ाने पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा. इसके लिए अतिरिक्त संसाधन खोजने का भार श्रम मंत्रालय पर होगा".
भारत में लगभग चार करोड़ लोग कर्मचारी भविष्य निधि के सदस्य हैं.
ईपीएफ़ की ब्याज़ दर को घटाने के पीछे एक प्रमुख कारण ये बताया जा रहा है कि 9.5 प्रतिशत ब्याज़ दर के समय वित्त वर्ष 2004-05 में ईपीएफ़ संगठन को 716 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था.
कर्मचारी संगठन कर्मचारी भविष्य निधि की ब्याज़ दर में किसी तरह के बदलाव का विरोध कर रहे थे.
कर्मचारी संगठनों ने माँग की थी कि ब्याज़ दर में कोई बदलाव न हो और उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दख़ल देने की माँग की थी.
पिछली बार श्रम मंत्री और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज़ (सीटीबी) के चेयरमैन के बीच हुई बैठक में यह वादा किया गया था कि ये मामला प्रधानमंत्री के पास ले जाया जाएगा.
कई श्रम संगठनों ने एक संयुक्त पत्र लिखकर श्रम मंत्री से मांग की थी कि ब्याज़ दर कम नहीं किया जाना चाहिए.
संगठनों की माँग थी कि विशेष जमा योजना और सरकारी बॉन्ड पर ब्याज़ बढ़ा देना चाहिए.
हालाँकि इस मामले पर वित्त और निवेश उप समिति ने सिफ़ारिश की थी कि कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर घटाकर आठ प्रतिशत कर देनी चाहिए.