बुधवार, 07 दिसंबर, 2005 को 10:30 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों के तक़रीबन 10 हज़ार लोगों को अब उन झीलों से ख़तरा पैदा हो सकता है जो भूकंप के बाद ज़मीनी उथल-पुथल की वजह से बनी हैं.
यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों के हवाले से दी गई है.
ये झीलें दक्षिण-पूर्वी मुजफ़्फ़राबाद में ज़मीन धसने के कारण दो छोटी नदियों के बंद हो जाने से बनी हैं.
इन झीलों में से एक झील की गहराई क़रीब 20 मीटर और चौड़ाई क़रीब 100 मीटर तक है.
पाकिस्तानी सेना के एक प्रवक्ता ने बताया है कि भुस्खलनों से नई आपदा पैदा हो सकती है.
पाकिस्तान सरकार के मुताबिक आठ अक्तूबर को आए भूकंप में 73 हज़ार लोगों की जान चली गई जबकि क़रीब तीस लाख लोग बेघर हो गए.
सेन्य प्रवक्ता मेजर-जनरल शौकत सुल्तान ने बताया कि भूवैज्ञानिक पूरे हालात का जायज़ा ले रहे हैं और उनके सुझावों के मुताबिक सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.
उन्होंने चिंता ज़ाहिर की कि आने वाले दिनों में होने वाली बर्फ़बारी या बरसात से बड़ा ख़तरा पैदा हो सकता है.
ठंड की मार
पिछले सप्ताह ही शरणार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन के हवाले से बताया गया है कि भूकंप प्रभावितो को जो टेंट मुहैया कराए गए हैं, वे सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए नहीं तैयार किए गए थे.
संगठन अब प्रभावितों के बीच आपातकालीन आवासीय व्यवस्था मुहैया कराने की तैयारी कर रहा है.
हिमालय से लगे इस क्षेत्र में ख़ासी ठंड होती है और इसी वजह से राहत कार्यों में जुटे तमाम संगठन यह अपील करते रहे हैं कि प्रभावितों को ठंड के हिसाब से तैयार किए गए टेंट मुहैया कराए जाएँ.
संगठन के प्रवक्ता डारेन बोइसवर्ट ने बताया कि प्रभावितों को दिए गए टेंटों में से तीन चौथाई ठंड का मुक़ाबला करने के लिए अनुकूल नहीं हैं.
पाकिस्तान सरकार के मुताबिक भूकंप प्रभावितों के लिए अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं की ओर से क़रीब पाँच सौ चालीस करोड़ डॉलर की मदद की पेशकश की गई है.
इनमें से तमाम मदद कम ब्याज दर वाले क़र्ज़ के तौर पर दी जाएगी.