सोमवार, 05 दिसंबर, 2005 को 01:27 GMT तक के समाचार
वोल्कर समिति की रिपोर्ट के बाद विवाद में फँसे पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह को कांग्रेस पार्टी ने बड़ा झटका दिया है. रविवार देर रात को पार्टी ने उन्हें संचालन समिति से हटाने का फ़ैसला किया.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी की अध्यक्षता में संचालन समिति की बैठक हुई जिसमें यह फ़ैसला हुआ. हालाँकि कुछ समय पहले ही नटवर सिंह ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति का समर्थन हासिल है.
तीसरी बार कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर चुने जाने के बाद सोनिया गाँधी ने संगठन में बदलाव किए थे और कांग्रेस कार्यसमिति को संचालन समिति में बदल दिया गया था.
रविवार देर रात कांग्रेस संचालन समिति की बैठक में सर्वसम्मति से नटवर सिंह को हटाने का फ़ैसला किया गया.
संचालन समिति में पारित प्रस्ताव में कहा गया है, "पिछले कुछ दिनों के दौरान हुए घटनाक्रमों के मद्देनज़र संचालन समिति ये समझती है कि मर्यादा के मुताबिक़ नटवर सिंह को संचालन समिति का सदस्य बनाए नहीं रखा जा सकता."
रविवार को ही नटवर सिंह ने कहा था कि वे मंत्री पद से त्यागपत्र नहीं देंगे. जानकारों का कहना है कि पार्टी ने संचालन समिति से उन्हें हटाकर ये संकेत दे दिया है कि पार्टी इस मामले पर कड़ा रुख़ अपनाएगी.
जानकारों का ये भी कहना है कि सवाल ये भी है कि अगर पार्टी उन्हें संचालन समिति का सदस्य बनाए नहीं रख सकती, तो वे मंत्री पद पर कैसे बने रह सकते हैं.
विचार
इससे पहले रूस के दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था अगर पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ख़ुद इस्तीफ़ा दें तो वे इस पर विचार करेंगे.
रूस के दौरे पर मॉस्को जाते समय विमान में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर कोई ख़ुद इस्तीफ़ा देता है, तो ऐसे मौक़े पर उन्हें सोचना पड़ेगा कि उनका क्या रुख़ होगा.
हालाँकि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में ये नहीं कहा कि अगर नटवर सिंह इस्तीफ़ा दे देते हैं तो उसे स्वीकार कर लेंगे. उन्होंने पत्रकारों को ये भी बताया कि शनिवार को नटवर सिंह से उनकी मुलाक़ात हुई थी और हाल के घटनाक्रमों पर उनलोगों ने विचार किया.
दूसरी ओर दिल्ली में वोल्कर समिति की रिपोर्ट के बाद विवादों में फँसे पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगे.
नटवर सिंह ने कहा कि अगर वे मंत्री पद से त्यागपत्र देते हैं तो इसका मतलब ये हुआ कि वे अपना दोष स्वीकार कर रहे हैं और इसलिए वे ऐसा नहीं करेंगे.
वोल्कर समिति ने अपनी रिपोर्ट में नटवर सिंह को उन व्यक्तियों की सूची में रखा है जिन्हें इराक़ के लिए संयुक्त राष्ट्र के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम से लाभ पहुँचा था. नटवर सिंह के साथ-साथ लाभ पाने वालों में कांग्रेस पार्टी का भी नाम है.
इसके बाद उनसे विदेश मंत्रालय को छीन लिया गया था लेकिन वे मंत्री पद पर बने हुए हैं यानी इस समय वे बिना विभाग के मंत्री हैं.
शुक्रवार को क्रोएशिया के तत्कालीन राजदूत अनिल मथरानी के एक पत्रिका को दिए कथित इंटरव्यू पर बवाल मच गया और उसकी गूँज संसद में भी सुनाई पड़ी.
पत्रिका के मुताबिक़ अनिल मथरानी ने बातचीत में कहा था कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने 2001 के इराक़ दौरे के समय अपने बेटे जगत सिंह और उनके मित्र अंदलीब सहगल को तेल का कूपन दिलाने में मदद की थी.
2001 में इराक़ गए प्रतिनिधिमंडल में अनिल मथरानी भी शामिल थे. संसद में हुए हंगामे के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बयान देना पड़ा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार जाँच की तह तक जाएगी.