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सोमवार, 05 दिसंबर, 2005 को 10:31 GMT तक के समाचार

अकेले पड़ते जा रहे हैं नटवर

वोल्कर समिति के मामले में पिछले चार दिनों के घटनाक्रम के बाद पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह अपनी पार्टी में अकेले पड़ते दिख रहे हैं.

कांग्रेस की संचालन समिति से हटाए जाने के पार्टी के निर्णय का जहाँ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने समर्थन किया है वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कह दिया है कि नटवर सिंह को पार्टी के हित में समुचित निर्णय लेना चाहिए.

इससे पहले नटवर सिंह को विदेश मंत्रालय छोड़कर बिना विभाग का मंत्री बनना पड़ा था. लेकिन इसके बाद भी नटवर सिंह के इस्तीफ़े को लेकर विपक्ष का दबाव बना हुआ है.

विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस की ओर से अब नटवर सिंह को पर्याप्त संकेत दिए जा चुके हैं कि वे इस्तीफ़ा देकर एक राजनीतिक विवाद को ख़त्म करें.

लेकिन रविवार शाम तक का नटवर सिंह का बयान था कि वे किसी भी सूरत में इस्तीफ़ा नहीं देने वाले हैं और अभी तक उनका कोई नया बयान नहीं आया है.

प्रधानमंत्री का समर्थन

इस समय रूस की यात्रा पर गए मनमोहन सिंह ने मॉस्को से इस निर्णय का समर्थन किया है.

कांग्रेस महासचिव ने कहा है कि मनमोहन सिंह को संचालन समिति के प्रस्ताव के बारे में पूरी जानकारी दी गई और प्रस्ताव की एक प्रति भी उन्हें भेज दी गई थी.

इससे पहले प्रधानमंत्री ने रविवार को एक सवाल के जवाब में स्पष्ट कर दिया था कि यदि नटवर सिंह ख़ुद मंत्रिपद से इस्तीफ़ा देते हैं तो वे उस पर विचार करेंगे.

संकेत

इतने संकेतों के बाद एक साफ़ संकेत देते हुए केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि कांग्रेस संचालन समिति से हटाए जाने के बाद की स्थिति को नटवर सिंह को ख़ुद समझना चाहिए.

उन्होंने कहा, "नटवर सिंह एक अनुभवी और परिपक्व राजनीतिक हैं वे परिस्थियों को समझेंगे और पार्टी के हित में समुचित निर्णय लेंगे."

कपिल सिब्बल ने कहा, "नटवर सिंह कुशाग्र बुद्धि हैं और वे इसे समझते हैं."

यह पूछने पर कि क्या यह नटवर सिंह के लिए कोई संकेत है, कपिल सिब्बल ने कहा, "राजनीतिक दल संकेत नहीं भेजा करते."

नटवर सिंह दोषी हैं या नहीं इस सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा, "यह हमें तय नहीं करना है कि कौन दोषी है और कौन नहीं, यह तो जस्टिस पाठक को तय करना है."

उन्होंने कहा, "इस बीच कई चीज़ें हो चुकी हैं, नटवर सिंह एक से अधिक बार खुद प्रेस से बात कर चुके हैं, उनके अलावा कई लोगों ने प्रेस से बात की है, इस सब के बाद नटवर सिंह को पार्टी की संचालन समिति में रहना संभव नहीं था."

उन्होंने कहा कि नटवर सिंह को संचालन समिति से हटाना एक राजनीतिक निर्णय है.

उल्लेखनीय है कि वोल्कर समिति ने अपनी रिपोर्ट में नटवर सिंह को उन व्यक्तियों की सूची में रखा है जिन्हें इराक़ के लिए संयुक्त राष्ट्र के तेल के बदले अनाज कार्यक्रम से लाभ पहुँचा था. नटवर सिंह के साथ-साथ लाभ पाने वालों में कांग्रेस पार्टी का भी नाम है.

इसके अलावा क्रोएशिया के पूर्व राजदूत और नटवर सिंह के सहयोगी रह चुके अनिल मथरानी के बयान ने एक और विवाद खड़ा कर दिया है.

अनिल मथरानी ने एक पत्रिका को दिए गए कथित साक्षात्कार में कहा था कि नटवर सिंह के बेटे जगत सिंह और उनके मित्र अंदलीब सहगल भी युवक कांग्रेस के प्रतिनिधि के रुप में इराक़ गए प्रतिनिधि मंडल में शामिल थे.

पहले तो जगत सिंह ने इसकी पुष्टि की लेकिन तत्कालीन युवक कांग्रेस अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला के बयान के बाद जगत सिंह ने कह दिया कि वे व्यक्तिगत तौर पर इराक़ यात्रा पर गए थे.