शनिवार, 03 दिसंबर, 2005 को 13:08 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह कुछ चुने हुए शहरों में सुविधाओं के बेहतर ढाँचा तैयार करने के लिए अरबों रुपए की लागत वाली एक महत्वकांक्षी योजना शुरू करने की घोषणा की है.
क़रीब दस खरब रुपए की लागत वाली इस योजना को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी विकास नवीनीकरण मिशन का नाम दिया गया है.
प्रधानमंत्री ने राजधानी दिल्ली में शनिवार को इस योजना की घोषणा करते हुए कहा, "शहरों के प्रशासन में हमारी एक मुख्य कमी ग़रीबों की ज़रूरतों पर ध्यान देने का अभाव रहा है."
"शहरों की बढ़ती आबादी के एक हिस्से को पीने के पानी की आपूर्ति, साफ़-सफ़ाई, आवास और सामाजिक सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं."
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय शहरों में अगर ग़रीबों को उनकी आय के अनुसार दायरे में ज़मीन ख़रीदने की सुविधा देने के लिए क़दम उठाए जाएँ तो उनके रहन-सहन में काफ़ी हद तक सुधार हो सकता है.
इस योजना को इस नज़रिए से भी देखा जा रहा है कि शहरों में सुविधाएँ बढ़ने के साथ ही नए पूंजी निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शहरी प्रशासन में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि शहरों में बुनियादी ढाँचे में सुधार बेहद ज़रूरी है.
सात साल के दौरान इस योजना को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा जिसमें ख़ास ज़ोर आवास, साफ़-सफ़ाई और झुग्गी-झोपड़ियों में सुधार जैसी बुनियादी सेवाओं पर रहेगा.
इस योजना के तहत साठ शहरों का चेहरा बदला जाएगा और दस लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहर इस योजना के दायरे में आएंगे.
इसके अलावा धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन के नज़रिए से महत्वपूर्ण शहरों को भी इस योजना के दायरे में रखा गया है.
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इससे पहले भी एक ग्रामीण रोज़गार योजना शुरू की है और इसे लागू करने के नज़रिए से देखा जाए तो यह दुनिया के सबसे बड़ी इस तरह की योजना है.
हालाँकि विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की महत्वकांक्षी योजनाएँ तभी कामयाब हो सकती हैं जब इनके लिए आवश्यक धन समय पर उपलब्ध हो और राज्य सरकारें भी इन्हें लागू करने में गंभीरता से काम लें.