रेणु अगाल
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से
इराक़ में 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम से संबंधित वोल्कर समिति रिपोर्ट पर शुक्रवार को भी भारतीय संसद के दोनो सदनो में हंगामा हुआ और दोपहर तक की कार्रवाई नहीं चल पाई.
संसद में बवाल भारत के क्रोएशिया में राजदूत अनिल मथरानी के पत्रिका 'इंडिया टुडे' में छपे इंटरव्यू को लेकर हुआ. वे वर्ष 2001 में काँग्रेस पार्टी के उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे जो इराक़ गया था.
राज्यसभा में पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह की गिरफ़्तारी की माँग उठी और भाजपा नेता जसवंत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री इस मामले में बयान देने से बच रहे हैं.
लेकिन शुक्रवार दोपहर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में बयान में पूरे मामले पर चिंता जताई.
उनका कहना था कि एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट यानि प्रवर्तन निदेशालय मामले की जाँच करेगा और जो कोई भी दोषी है उसे दंड मिलेगा.
उनका कहना था, "यूपीए सरकार का रवैया स्पष्ट रहा है और वोल्कर समिति रिपोर्ट में नाम तो लिए गए हैं लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है...हमने मामले की तह तक जाने की बात कही है और हम उस पर कायम हैं."
संयुक्त राष्ट्र की वोल्कर रिपोर्ट में इराक़ के 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में लगभग 2000 कंपनियों को अवैध पैसा दिए जाने की बात कही गई है.
इस रिपोर्ट में नटवर सिंह और काँग्रेस पार्टी का नाम 'लाभ मिलने वालों' में शामिल है. नटवर सिंह इस मामले में दोषी होने से पूरी तरह इनकार करते रहे हैं.
संसद में बवाल
इस इंटरव्यू में मथरानी ने आरोप लगाया है कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने अपने पुत्र जगत सिंह और उनके मित्र अंदलीब सहगल को 'तेल के कूपन' दिलाने में मदद की थी.
भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने तो नटवर सिंह की गिरफ़्तारी की माँग कर डाली.
मथरानी ने यहाँ तक दावा किया है कि नटवर सिंह को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अपना नाम होने की जानकारी थी.
उधर संसद में प्रधानमंत्री के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि शायद प्रधानमंत्री ने अपनी ही पार्टी के भीतर बात नहीं की है.
उनका कहना था, "इराक़ गए प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने आरोपों की पुष्टि कर दी है इसलिए ये अपुष्ट आरोप नही हैं."
इस संदर्भ में आडवाणी ने कहा कि काँग्रेस पार्टी का नाम आने के बाद काँग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को भी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के चेयरपर्सन के पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
इसके बाद सदन में नारेबाज़ी शुरु हो गई और जहाँ विपक्ष ने सोनिया गाँधी के ख़िलाफ़ नारे लगाए वहीं सत्ताधारी पक्ष ने आडवाणी और एनडीए संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस मामले में छप रही नई जानकारी से जहाँ नटवर सिंह पर मंत्रिमंडल छोड़ने का दबाव बढ़ेगा वहीं काँग्रेस की इस मामले में कथित भूमिका से ध्यान हटाने की कोशिश भी हो रही है.