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गुरुवार, 01 दिसंबर, 2005 को 08:34 GMT तक के समाचार

'अफ़ग़ानिस्तान को सहायता जारी रहेगी'

भारतीय रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि एक कर्मचारी के अपहरण और हत्या की घटना के बाद भी भारत अफ़ग़ानिस्तान में चल रही किसी परियोजना को बंद नहीं करेगा.

उन्होंने कहा कि इस समय अफ़ग़ानिस्तान को इस समय सहायता की ज़रुरत है और भारत एक देश की तरह मानता है कि शांति स्थापना के लिए यह सहायता जारी रखना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि गत 19 नवंबर को भारतीय सीमा सड़क संगठन के ड्राइवर मनियप्पन रामन कुट्टी का अपहरण करने के बाद हत्या कर दी गई थी.

वे 300 अन्य भारतीयों के साथ अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी प्रांत में चल रहे एक सड़क परियोजना में काम करने गए थे.

मनियप्पन रामन कुट्टी के अपहरणकर्ताओं ने कथित तौर पर ये माँग की थी कि सीमा सड़क संगठन को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ देना चाहिए. और कुट्टी की हत्या के बाद से यह बहस चल पड़ी थी कि क्या अफ़ग़ानिस्तान में भारत को काम बंद कर देना चाहिए.

राज्य सभा में इस विषय पर हुई बहस का जवाब देते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा, "यदि दुनिया में शांति स्थापित करना है तो यह ख़तरा तो उठाना ही होगा."

हर जान को क़ीमती बताते हुए उन्होंने कहा, "इसकी क़ीमत भी चुकानी होगी और कई बार ये क़ीमत भारी भी हो सकती है."

उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यों में ज़्यादातर सुरक्षा आदि की ज़िम्मेदारी उस देश की होती है जहाँ काम हो रहा है और इस नाते परियोजनाओं में काम करने वालों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़ग़ानिस्तान सरकार की है लेकिन भारत ने भी सुरक्षा के अपने इंतज़ाम किए हैं और उसे बढ़ाया जा रहा है.

परिवार को सहायता

केरल निवासी कुट्टी के परिवार की सहायता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भरसक सहायता उपलब्ध करवाने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके संस्थान की ओर से तक़रीबन नौ लाख रुपयों की सहायता दी जा रही है और प्रधानमंत्री ने सहायता कोष से पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की है. इसके अलावा राज्य सरकार ने भी पाँच लाख रुपयों की सहायता की घोषणा की है.

रक्षा मंत्री ने बताया कि कुट्टी की पत्नी को उनकी अंतिम तनख़्वाह के बराबर (7,260 रुपए) की पेंशन आजीवन दी जाएगी.

उन्होंने सदस्यों को आश्वासन दिया कि उनकी माँगों के अनुरुप सरकार कुट्टी के दोनों बच्चों की स्कूली शिक्षा मुफ़्त करवाने का इंतज़ाम करेगी.