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बुधवार, 30 नवंबर, 2005 को 12:09 GMT तक के समाचार

लड़ाई विचारधारा की है : उमा भारती

भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किए जाने के बाद विद्रोही नेता उमा भारती ने कहा है कि व्यक्तियों का कोई महत्व नहीं है और उनकी लड़ाई विचारधारा और लोकतांत्रिक तरीक़े को लेकर है.

उन्होंने इस मामले को व्यक्तिगत राग द्वेष से ऊपर उठकर इस मामले को सुलझाने की ज़रुरत बताई है.

नई पीढ़ी को ज़िम्मेदारी सौंपे जाने के संघ के सुझाव का स्वागत करते हुए उमा भारती ने कहा है कि वे दीनदयाल उपाध्याय के रास्ते पर चल रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का आशीर्वाद उन्हें मिलेगा.

भोपाल से अयोध्या से पद यात्रा पर निकल चुकी उमा भारती ने रास्ते से एक लिखित बयान जारी किया है.

उल्लेखनीय है कि बुधवार की सुबह मध्यप्रदेश में नेतृत्व के मसले पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के ख़िलाफ़ खुलकर खड़ी उमा भारती को पार्टी विरोधी गतिविधियों का दोषी पाते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया है.

पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद उमा भारती को नोटिस भी जारी किया गया है कि क्यों न उनको पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए. जवाब देने के लिए उन्हें तीन दिन का समय दिया गया है.

पद के लिए नहीं

अपने बयान में तीन दिन का समय दिए जाने के लिए आभार जताते हुए उन्होंने कहा है कि वे निर्धारित समय में अपना जवाब दे देंगीं.

हालांकि वे ख़ुद मुख्यमंत्री बनना चाहती थीं और उनकी पूरी नाराज़गी इसी बात की थी कि शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाए जाने का फ़ैसला क्यों किया गया.

लेकिन उन्होंने अपने बयान में कहा है, "मैं पद की ख़ातिर पार्टी में काम नहीं करती हूँ पार्टी सही तरह से विचारधारा के आधार पर कार्य करे. यही मेरी नियत थी और आज भी है."

उन्होंने कहा है, "संघ के लोगों ने विचारधारा, आचरण, सही कार्यपद्धति और पीढ़ी के बदलने का आग्रह सात्विक भाव से रखा है. मैं उसकी दृढ़ हिमायती हूँ."

उमा भारती ने भाजपा नेताओं पर लगाए गए अपने आरोपों को लेकर बिना अफ़सोस जताए कहा है कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं उसे व्यक्तिगत राग द्वेष से ऊपर उठकर समझने और सुलझाने की ज़रुरत है.

उल्लेखनीय है कि भाजपा संसदीय बोर्ड ने उन्हें आचरण और बयान के आधार पर पार्टी से निलंबित किया है.