बुधवार, 30 नवंबर, 2005 को 20:53 GMT तक के समाचार
भारत के ग्रामीण इलाक़ों में तेज़ी से एचआईवी संक्रमण फैलने को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने गहरी चिंता प्रकट की है.
एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस से पहले अधिकारियों ने कहा है कि ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के कारण स्थिति और भयावह रूप लेती जा रही है.
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की प्रमुख सुजाता राव का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में एचआईवी संक्रमण दूर-दराज़ के गाँवों तक जा पहुँचा है.
लेकिन सरकार का यह भी कहना है कि एचआईवी संक्रमण के प्रसार की दर में तेज़ी से कमी आ रही है.
भारत में पचास लाख से अधिक लोग एचआईवी संक्रमण से ग्रस्त हैं, इस तरह भारत दुनिया में एचआईवी के मामले में दक्षिण अफ्रीका के बाद दूसरे नंबर पर है.
सुजाता राव ने कहा, "अब तक एड्स या एचआईवी एक शहरी बीमारी समझी जा रही थी लेकिन अब चिंता की बात ये है कि इसने गाँवों में भी पैर फैलाना शुरू कर दिया है."
आँकड़े
भारत के स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदौस ने ज़ोर देकर कहा है कि भारत में एचआईवी ग्रस्त लोगों की संख्या पचास लाख से बहुत अधिक नहीं है जबकि संयुक्त राष्ट्र की एड्स नियंत्रण संबंधी संस्था के प्रमुख का कहना है कि भारत में सरकारी आंकड़ों की तुलना में बहुत ज़्यादा लोग संक्रमित हैं.
स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि वर्ष 2004 में संक्रमण के सिर्फ़ 28 हज़ार मामले सामने आए जबकि 2003 में यह संख्या पाँच लाख से ऊपर थी, रामदौस का कहना है कि इन आँकड़ों की विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पुष्टि की है.
इन आँकड़ों को मानने से संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएड्स ने इनकार कर दिया था और भारत की ग़ैर सरकारी संस्थाओं का भी मानना है कि सरकारी आँकड़े सही नहीं हैं.
वैसे भारत के स्वास्थ्य मंत्री ख़ुद भी स्वीकार करते हैं कि आँकड़े पूरी कहानी बयान नहीं करते.
वे कहते हैं,"बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, राजस्थान और पूर्वोत्तर राज्यों में बहुत सारे ऐसे लोग संक्रमित होंगे जिनके बारे में पता नहीं है."
अगर संक्रमित व्यक्ति को पता नहीं हो तो उससे बीमारी के फैलने का ख़तरा और अधिक बढ़ जाता है.