भारतीय जनता पार्टी के भीतर भारी खींचतान, बाहर हुए तोड़फोड़ और फिर उमा भारती समर्थकों पर हुई अनुशासन की कार्रवाई के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.
राज्यपाल बलराम जाखड़ ने उन्हें राजभवन में शपथ दिलवाई. फ़िलहाल उन्होंने अकेले ही शपथ ली है.
अभी यह तय नहीं हुआ है कि शिवराज सिंह का मंत्रिमंडल कब शपथ लेगा. बताया गया है कि वरिष्ठ
नेताओं से चर्चा के बाद इसका फ़ैसला बाद में किया जाएगा.
मध्यप्रदेश में भाजपा के दो साल के कार्यकाल में शिवराज सिंह चौहान तीसरे मुख्यमंत्री हैं.
सबसे पहले उमा भारती को मुख्यमंत्री बनाया गया था लेकिन एक मामले में ग़ैरज़मानती वारंट के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा और बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया गया था.
अब बाबूलाल गौर के ख़िलाफ़ असंतोष के बाद शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाया गया है.
विवाद
हालांकि शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाना उतना आसान नहीं रहा जितना पार्टी के लिए बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री बनाया जाना था.
इसका कारण यह था कि पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता उमा भारती ख़ुद इस पर बैठना चाहती थीं.
इसीके चलते उमा भारती ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने के भाजपा संसदीय बोर्ड के फ़ैसले का विरोध किया था.
उनका कहना था कि भाजपा ने विधायक दल की बैठक से पहले विधायक दल का नेता चुनकर एक इतिहास क़ायम किया है.
इसके बाद सोमवार को विधायक दल की बैठक के दौरान उमा भारती समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के बाहर जमकर तोड़फोड़ किया और उमा भारती सहित 14 विधायक बैठक का बहिष्कार करके बाहर निकल आए.
इसका गंभीर नोटिस लेते हुए पार्टी ने छह नेताओं को पार्टी से निलंबित कर दिया है और 13 विधायकों को नोटिस दी गई है.
उमा भारती पर कार्रवाई के लिए बुधवार को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक हो रही है.