मंगलवार, 29 नवंबर, 2005 को 09:56 GMT तक के समाचार
भोपाल में सोमवार को विधायक दल की बैठक के दौरान हुए हंगामे और 14 विधायकों के बैठक से उठकर चले जाने के बाद अनुशासन समिति ने कड़े क़दम उठाए हैं.
पूर्व सांसद प्रहलाद पटेल सहित छह नेताओं को पार्टी से तत्काल निलंबित कर दिया गया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा पूछा है कि क्यों न उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए.
विधायक दल की बैठक से वॉकआउट करने वाले 14 में से 13 विधायकों को अनुशासन समिति ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 72 घंटों के भीतर जवाब देने को कहा है.
चौदहवीं विधायक उमा भारती ख़ुद ही थीं और चूंकि वे पार्टी की महासचिव बना दी गई हैं इसलिए उन पर किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का फ़ैसला करने के लिए संसदीय बोर्ड की बैठक बुलानी पड़ेगी.
पार्टी नेताओं के अनुसार यह बैठक बुधवार को दिल्ली में होने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि बाबूलाल गौर की जगह शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री बनाने के फ़ैसले के अनुमोदन के लिए सोमवार को भोपाल में विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी.
इस फ़ैसले से नाराज़ उमा भारती के समर्थकों ने पार्टी कार्यालय के भारी हंगामा और तोड़फोड़ की थी और 14 विधायक बैठक बीच में छोड़कर बाहर निकल आए थे.
कार्रवाई
मध्य प्रदेश भाजपा की अनुशासन समिति ने जिन छह नेताओं पर कार्रवाई की है उनमें पूर्व सांसद और उमा भारती के कट्टर समर्थक प्रहलाद पटेल के अलावा शैलेन्द्र शर्मा, महेंद्र सिंह, सुधीर अग्रवाल, शैतान सिंह और शिवशंकर पटेल हैं.
इन नेताओं से कहा गया है कि वे 48 घंटों के भीतर बताए कि क्यों ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया जाए.
इसी तरह 13 विधायकों को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नोटिस दी गई है.
इन विधायकों में पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार, सुनील नायक, जालम सिंह पटेल और ढालसिंह बिसेन प्रमुख हैं.
पार्टी की इस कार्रवाई पर उमा भारती की प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है लेकिन उन्होंने सुबह की किसी भी कार्रवाई के ख़िलाफ़ पार्टी के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा था कि वे ख़ुद भाजपा हैं और उन्हें पार्टी से कोई नहीं निकाल सकता.