सोमवार, 28 नवंबर, 2005 को 08:46 GMT तक के समाचार
केंद्र की यूपीए सरकार ने संयुक्त राष्ट्र से हासिल की गई वोल्कर समिति की रिपोर्ट को संसद में रखने से इनकार कर दिया है.
सरकार ने कहा कि इस मामले की जाँच कर रही समिति को यह रिपोर्ट सौंपी जाएगी.
वोल्कर समिति की रिपोर्ट और इससे जुडे दस्तावेज़ हाल ही में भारत सरकार के विशेष दूत वीरेंद्र दयाल ने संयुक्त राष्ट्र से हासिल किए थे.
इस बीच लोकसभा में वोल्कर समिति की रिपोर्ट पर विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव ध्वनि मत से गिर गया है.
उल्लेखनीय है कि इराक़ के 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' में हुए घोटाले की जाँच कर रही वोल्कर समिति ने इस घोटाले में कथित रुप से कांग्रेस और पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के शामिल होने का आरोप लगाया है.
इस ख़बर के बाद भारत में काफ़ी राजनीतिक बवाल मचा और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश आरएस पाठक के नेतृत्व में एक सदस्यीय जाँच समिति का गठन कर दिया था.
इनकार
विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में मांग की थी कि वोल्कर समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाए लेकिन सरकार की ओप से विपक्ष की इस माँग को ठुकरा दिया.
आडवाणी ने इस माँग को लेकर लोकसभा के अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को एक पत्र भी भेजा था.
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने यह मामला उठाया था और इसका जवाब देते हुए सदन के नेता और रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि वोल्कर समिति की रिपोर्ट को जाँच अधिकारियों के अलावा कोई भी नहीं देख सकता.
इसी तरह राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जसवंत सिंह ने यह मांग उठाई और इसके जवाब में संसदीय कार्य राज्यमंत्री सुरेश पचौरी ने कहा कि इस समय इन दस्तावेजों का आर्थिक अपराध शाखा के अधिकारी जाँच कर रहे हैं और बाद में इसे जाँच समिति के अध्यक्ष आरएस पाठक को सौंप दिया जाएगा.
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस तरह के दस्तावेज़ सिर्फ़ जाँच समिति को सौंपे जाने चाहिए.