सोमवार, 28 नवंबर, 2005 को 13:23 GMT तक के समाचार
उमर फ़ारूक़
हैदराबाद से
माफ़िया सरगना अबू सालेम के साथ पुर्तगाल से भारत लाई गई फ़िल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी के वकील ने कहा है कि वे सालेम की गर्लफ्रेंड नहीं बल्कि बंधक थी.
हैदराबाद में सीबीआई की विशेष अदालत में ज़मानत की अर्ज़ी दाख़िल करते हुए मोनिका बेदी के वकील रूचिर बत्रा ने मोनिका बेदी को सालेम की दोस्त कहना ग़लत होगा क्योंकि वह माफ़िया सरगना के साथ क़ैदी की तरह रह रही थी.
मोनिका के वकील ने कहा कि उन्हें पासपोर्ट के जाली होने की कोई जानकारी नहीं थी.
बत्रा ने कहा कि मोनिका बेदी को बिल्कुल पता नहीं था कि अबू सालेम ने उसके लिए जाली पासपोर्ट बनवाया है, वकील ने दावा किया कि पासपोर्ट पर या आवेदन पर कहीं मोनिका के हस्ताक्षर नहीं हैं.
इसे सालेम-मोनिका के मुक़दमे में एक नया मोड़ माना जा रहा है और यह साफ़ है कि मोनिका माफ़िया सरगना से खुद को पूरी तरह अलग करने की कोशिश में लगी हुई हैं.
इससे पहले अबू सालेम के वकील ओवैस सिद्दीक़ी ही मोनिका का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए अदालत में पेश हुए थे, अब मोनिका के चाचा पुरूषोत्तम लाल ने रूचिर बत्रा को मोनिका का नया वकील बनाया है.
सीबीआई के वकील ने मोनिका को ज़मानत दिए जाने का ज़ोरदार विरोध किया और कहा कि वे गवाहों पर दबाव डाल सकती हैं या ज़मानत पर रिहा होने के बाद फरार हो सकती हैं.
सीबीआई के वकील ने आरोप लगाया है कि मोनिका आदतन अपराधी हैं और उनके ख़िलाफ़ जाली पासपोर्ट बनवाने का एक और मामला चल रहा है.
उनकी ज़मानत की अर्ज़ी के ख़िलाफ़ यह दलील भी दी गई कि उनका कोई स्थायी पता नहीं है इसलिए वे ज़मानत मिलने पर फ़रार हो सकती हैं.
मोनिका बेदी पुर्तगाल में फ़र्ज़ी पासपोर्ट के आधार पर दाख़िल होने के अपराध में पहले ही जेल काट चुकी हैं.
अबू सालेम इस समय मुंबई की जेल में बंद हैं जहाँ उनसे 1993 के मुंबई बम कांड के सिलसिले में पूछताछ की जा रही है, जबकि मोनिका हैदराबाद में हैं.