संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने नेपाल में लोकतंत्र बहाली के लिए माओवादियों और विपक्षी दलों के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है.
माओवादी और सात विपक्षी दल लोकतंत्र बहाली पर सहमत हो गए हैं.
महाराज ज्ञानेंद्र ने माओवादियों से राजनीतिज्ञों के न निपट पाने की दलील देते हुए फ़रवरी में सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.
इस समझौते के तहत विद्रोहियों ने कहा है कि यदि चुनाव हुए तो वो स्वतंत्र निगरानी की भी अनुमति देंगे.
समझौते पर कोफ़ी अन्नान के प्रवक्ता ने कहा, '' महासचिव इसका स्वागत करते हैं और समझौते का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने शांति प्रक्रिया में सहायता की पेशकश की है.''
भारत सरकार ने भी विपक्षी दलों और माओवादी विद्रोहियों के बीच हुए समझौते का स्वागत किया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना था कि भारत सरकार एक तरफ राजशाही को राजनीतिक पार्टियों से बात करने और दूसरी तरफ़ माओवादियों से हिंसा का रास्ता त्याग कर बहुदलीय लोकतंत्र को स्वीकार करने का आग्रह करती रही है.
लेकिन नेपाल सरकार की ओर से समझौते पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है और कहा गया है कि वह इस समझौते का अध्ययन कर रही है.
नेपाल में सात प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने मंगलवार को राजा ज्ञानेंद्र के विरोध और देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए माओवादी विद्रोहियों के साथ 12 सूत्री समझौता होने की घोषणा की थी.
लेकिन इन पार्टियों ने कहा है कि माओवादियों के साथ मिलकर किसी तरह का आंदोलन तभी शुरू किया जाएगा जब विद्रोही हथियार त्याग देंगे.
नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने इस वर्ष के आरंभ में देश की सरकार को बर्ख़ास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी.