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ईरान पर सरकार और वामदल एकमत

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और वाममोर्चा समन्वय समिति की एक अहम बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि ईरान के मसले पर सरकार ने वामपंथियों की बात मान ली है.

सरकार की ओर से वामपंथियों को बताया गया है कि वह प्रयासरत है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मामला अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में ही रखने के प्रयास किए जाएँ और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाने न दिया जाए.

वामपंथियों ने इससे सहमति जताते हुए कहा है कि वे भी ईरान पर यही माँग कर रहे थे.

आईएईए की 24 नवंबर को होने वाली बैठक में ईरान पर चर्चा होनी है.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले एक बार आईएईए की बैठक में भारत ईरान के ख़िलाफ़ मतदान कर चुका है. इसके बाद से ही वामपंथी नाराज़ चल रहे थे.

सोमवार को हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि सरकार की ओर से कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं कि ईरान का मामला आईएईए में ही रहे.

बैठक में यूपीए की ओर से मौजूद वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि सरकार से किए जा रहे प्रयासों के विवरण वामपंथी दलों को दिए गए हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि "सरकार ने स्पष्ट रुप से वही कहा है जो हम कह रहे थे कि ईरान का मामला आईएईए में ही रहने देना चाहिए और इसे संयुक्त राष्ट्र में नहीं जाने दिया जाने देना चाहिए."

उन्होंने भी बताया कि सरकार कूटनीतिक प्रयास कर रही है.

वाममोर्चा पहले कह चुका है कि यदि केंद्र ईरान के ख़िलाफ़ मतदान करने का फ़ैसला करता है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और इस मामले में बिना किसी बाहरी दबाव में आए हुए भारत-ईरान संबंधों के रुप में देखना चाहिए.

दूसरे विषय

इस बैठक में इसके अलावा पेंशन फंड विधेयक के बारे में भी चर्चा हुई है जो संसद में पेश किया जा चुका है.

पी चिदंबरम ने बताया कि सरकार ने स्थाई समिति की ज़्यादातर सिफ़ारिशों को मंज़ूर करते हुए विधेयक में संशोधन कर दिए हैं और वामपंथी दलों ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है.

सीताराम येचुरी ने कहा कि वामदल अब इस पर विचार करेंगे और जल्दी ही वे अपनी राय से सरकार को अवगत करवाएँगे.

दोनों नेताओं ने कहा कि ईपीएफ़ के बारे में बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई.

बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार वामदलों ने लाभ अर्जित करने वाली ऐसी कंपनियों के सीमित विनिवेश के लिए हामी भरी है, जो नवरत्न में शामिल नहीं हैं.

वामदलों ने संसाधन जुटाने के और उपाय सुझाने की भी हामी भरी है.

इसके अलावा सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विधेयक, सांप्रदायिक सौहार्द विधेयक और अनुसूचित जाति (वन अधिकार प्रबंधन) विधेयक के बारे में भी जानकारी दी गई है.