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रविवार, 20 नवंबर, 2005 को 16:27 GMT तक के समाचार

नागेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

दोतरफ़ा कार्रवाई की ज़रूरत :कौशल

भारत में आतंरिक सुरक्षा विभाग के पूर्व सचिव एमबी कौशल का कहना है कि नक्सली समस्या के हल के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और क़ानून व्यवस्था दोनों का साथ होना ज़रुरी है.

लेकिन उनकी बातों का खंडन करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता और माओवादी चिंतक जीएन साईंबाबा ने कहा कि नक्सलवाद एक राजनीतिक आंदोलन है और इसे सामाजिक-आर्थिक मामले के रुप में देखते हुए हल करना चाहिए.

दोनों 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब दे रहे थे.

एमबी कौशल का कहना था कि यह स्वीकार करना चाहिए कि नक्सली या माओवादी समस्या एक सामाजिक-आर्थिक समस्या है लेकिन आंदोलन हिंसा के रास्ते पर चला गया है इसलिए इसे क़ानून व्यवस्था की स्थिति भी मानना होगा.

उनका कहना था कि समस्या अब गंभीर हो गई है और देश के बड़े हिस्सों में नक्सलियों ने एक व्यवस्था क़ायम कर ली है.

उन्होंने कहा कि माओवादी आंदोलन ग़लत हाथों में पड़कर सिद्धांतों से भटक गया है और इसलिए हिंसक हो गया है. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में जम्मू कश्मीर से ज़्यादा लोग नक्सली हिंसा में मारे गए हैं.

लेकिन जीएन साईंबाबा का कहना था कि हिंसा की जो घटनाएँ होती हैं वह सरकार की ओर से की जा रही हिंसा के जवाब में ही होती है.

साईंबाबा का कहना था कि नक्सली आंदोलन जनता का आंदोलन है और सामंतवादी शक्तियों के दमन के विरोध में यह आंदोलन खड़ा हुआ था. उन्होने एक श्रोता के सवाल के जवाब में कहा कि जब सरकार सामंतवादियों के समर्थन में आ गई तो आंदोलन सरकार के भी ख़िलाफ़ हो गया.

आम आदमी

एक श्रोता के सवाल के जवाब में जीएन साईंबाबा ने कहा कि हिंसा मूल रुप से माओवादी आंदोलन की नीति नहीं है और न ही आंदोलन के लोग किसी आम ग्रामीण की हत्या करते हैं.

उनका कहना था कि यदि किसी ग्रामीण को मारा जाता है तो इसलिए क्योंकि उसका उपयोग सरकार नक्सलियों के ख़िलाफ़ कर रही होती है.

लेकिन एमबी कौशल का कहना था कि हिंसा से आम लोगों को परेशानी होती है और सरकार को भी ध्यान रखना चाहिए कि जब नक्सलियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो तो आम आदमी को परेशानी न हो.

उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सली गाँव वालों से पैसा वसूलते हैं.

जहानाबाद की घटना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में एमबी कौशल ने आरोप लगाया कि नक्सली अपने लोगों को छुड़ाकर ले जाते वहाँ तक तो ठीक था लेकिन उन्होंने रणवीर सेना के लोगों को भी मारा और कुछ लोगों को अपने साथ ले गए.

इसके जवाब में साईंबाबा ने कहा कि यह सूचना ग़लत है कि नक्सलियों ने रणवीर सेना के लोगों को मारा या अपने साथ ले गए.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने आरोप लगाया कि जेलों में जो भी माओवादी या नक्सली नेता बंद हैं वे अपनी राजनीतिक विचारधारा के कारण बंद हैं. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उनके ऊपर आपराधिक मामले भी हो सकते हैं.

समस्या का हल

समस्या के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिल्ली के पुलिस कमीश्नर रह चुके कौशल का कहना था, "पुलिस को अपनी कार्रवाई करते हुए लोगों को अपने साथ लेना होगा और राजनीतिक कार्रवाई करते हुए लोगों की परेशानी का ध्यान रखना होगा."

समस्या के हल के बारे में साईंबाबा का कहना था कि इस समस्या को वर्ग संघर्ष के रुप में देखना होगा जो कई देशों की समस्या रह चुकी है.

उन्होंने कहा, "माओवादी समस्या को राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक समस्या के रुप में देखना होगा क़ानून-व्यवस्था की समस्या के रुप में नहीं."