शनिवार, 19 नवंबर, 2005 को 09:34 GMT तक के समाचार
श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अपने पहले वक्तव्य में कहा है कि वो देश में 'सम्मानजनक तरीके' से शांति बहाली की दिशा में काम करेंगे.
शनिवार को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद राजपक्षे ने साफ़तौर पर कहा है कि कि वो चरमपंथियों के साथ चल रहे युद्धविराम की समीक्षा करने के लिए तैयार है.
लेकिन उन्होंन यह भी कहा कि वह किसी भी सूरत में अल्पसंख्यक तमिल समुदाय के लिए एक स्वायत्त सत्तावाले टापू की चरमपंथियों की माँग को नहीं स्वीकार करेंगे.
उन्होंने कहा, "हम एक ही देश में क़ानून व्यावस्था बहाल रखेंगे."
राजपक्षे ने आज कोलंबो स्थित राष्ट्रपति भवन में श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश एसएन सिल्वा के सामने अपने पद की शपथ ली.
उधर चुनाव अधिकारियों ने राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार रनिल विक्रमसिंघे की पार्टी के लोगों की इस बात को मानने से इनकार कर दिया है कि तमिल चरमपंथियों वाले इलाकों में मतदान फिर से कराया जाए.
ग़ौरतलब है कि तमिल चरमपंथियों वाले इलाकों में लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया था.
रनिल विक्रमसिंघे तमिल चरमपंथियों के प्रति नरम रुख़ रखने वाले नेता माने जाते हैं जबकि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति राजपक्षे वैचारिक रूप से कड़े रुख़वाले माने जाते हैं.
चिंता
महिंदा राजपक्षे श्रीलंका के लोकप्रिय फिल्म अभिनेता रहे हैं और उनका श्रीलंका के दक्षिण सिंहला बहुल क्षेत्रों में काफ़ी प्रभाव रहा है.
राजपक्षे ने तमिल विद्रोहियों की स्वतंत्रता की मांग को तो ठुकरा ही दिया है और कहा है कि सुनामी प्रभावित क्षेत्रों के लिए इकट्ठा राहत सामग्री को पूरी तरह सरकार ही संभालेगी.
तमिल चरमपंथियों और श्रीलंका सरकार के बीच बातचीत के लिए मध्यस्थता कर रहे नॉर्वे के एक राजनीतिक, एरिक सोल्हेम ने राजपक्षे की इन टिप्पणियों से शांति प्रक्रिया प्रभावित होने का ख़तरा जताया है.
उन्होंने एक रेडियो सेवा को बताया, "अब स्थितियाँ काफ़ी कठिन प्रतीत हो रही है."
उन्होंने यह भी कहा कि तमिल चरमपंथियों द्वारा चुनाव के बहिष्कार के निर्णय से उनके एक राजनीतिक प्रक्रिया को ख़ारिज करने के संकेत भी मिलते हैं.
राजपक्षे ने शांति प्रकिया में नोर्वे की मध्यस्थ भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.