बुधवार, 16 नवंबर, 2005 को 10:03 GMT तक के समाचार
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर गहमागहमी बढ़ गई है.
मंगलवार को लालकृष्ण आडवाणी ने दोहराया है कि वे अब पद पर नहीं रहना चाहते और दिसंबर में पद छोड़ ही देंगे.
इस घोषणा के बाद पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान उपाध्यक्ष वेंकैया नायडू ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं से मुलाक़ात की है.
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान दौरे के दौरान लालकृष्ण आडवाणी के जिन्ना से जुड़े बयान को लेकर संघ और पार्टी के भीतर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था और इसी के चलते सितंबर में चेन्नई में हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद आडवाणी ने दिसंबर में पद छोड़ने की घोषणा की थी.
पिछले दिनों यह चर्चा एक बार फिर चल पड़ी थी कि क्या लालकृष्ण आडवाणी दिसंबर में अपना पद सच में छोड़ने जा रहे हैं, क्योंकि नए अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया अब तक शुरु नहीं हुई है.
इन चर्चाओं की वजह से ही शायद मंगलवार को लालकृष्ण आडवाणी ने एक बयान जारी करके कहा कि वे मुंबई में दिसंबर के तीसरे हफ़्ते होने वाले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपना पद छोड़ देंगे.
उन्होंने अपने बयान में कहा था, "पद छोड़ने के फ़ैसले से पहले मैं बहुत तनाव में था और इसके बाद मैं राहत महसूस कर रहा हूँ."
आरएसएस
आडवाणी के इस बयान के बाद उनके सबसे करीबी माने जाने वाले वेंकैया नायडू ने आरएसएस के दिल्ली कार्यालय जाकर संघ नेताओं से बात की है.
संघ कार्यालय में वेंकैया नायडू ने मोहन भागवत और सुरेश सोनी से मुलाक़ात की है. हालांकि संघ प्रमुख केएस सुदर्शन भी वहाँ मौजूद थे लेकिन नायडू की उनसे मुलाक़ात नहीं हुई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार नायडू ने इन मुलाक़ातों के बाद कहा है कि उनकी भाजपा नेतृत्व के बारे में कोई बात नहीं हुई है.
उन्होंने कहा, "संघ किसी भी तरह से भाजपा के कामकाज में कोई दखल नहीं देता."
लेकिन ख़बरें हैं कि आरएसएस ने एक बार फिर भाजपा पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है कि दिसंबर में हर हाल में नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया जाए.