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शुक्रवार, 11 नवंबर, 2005 को 12:43 GMT तक के समाचार

सालेम को अदालत ने हिरासत में भेजा

पुर्तगाल से भारत लाए गए माफ़िया सरगना अबू सालेम को मुंबई में विशेष आतंकवाद निरोधक अदालत के सामने पेश किया गया है जिसने उन्हें 23 नवंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया.

36 वर्षीय अबू सालेम को कड़ी सुरक्षा के बीच 1993 के मुंबई बम धमाके के सिलसिले में अदालत में पेश किया गया.

मुंबई से बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि अबू सालेम ने सवालों के जवाब हिंदी में दिए और वे काफ़ी थके हुए लग रहे थे.

सिर्फ़ मुंबई पुलिस ने ही उनके ख़िलाफ़ 25 मुक़दमे दर्ज़ किए हैं.

न्यायाधीश पीडी कोडे की अदालत ने अबू सालेम के वकील ओए सिद्दीक़ी को अनुमति दी है कि वे सालेम से एक दिन छोड़कर हर दूसरे दिन एक घंटे के लिए मिल सकते हैं.

मुंबई बम धमाकों सहित साठ से अधिक मामलों में पुलिस को उनकी तलाश थी, पुलिस का कहना है कि सालेम 1993 के धमाकों के बाद भारत से भाग गए थे.

कई मामले

मार्च 1993 में हुए बम धमाकों में 250 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी और एक हज़ार से ज़्यादा घायल हुए थे.

पुलिस अबू सालेम को गुलशन कुमार और मनीषा कोईराला के सेक्रेटरी अनिल देवानी की हत्या के मामले में भी शामिल मानती है.

बाद में पुलिस सालेम की प्रेमिका मोनिका बेदी को हैदराबाद ले गई जहाँ उनके ख़िलाफ़ ग़लत दस्तावेज़ों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के आरोप में मामला दर्ज है.

यह पहला मौक़ा है जबकि किसी अभियुक्त को किसी यूरोपीय देश से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया जा सका है.

यूरोपीय देशों में मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है और उनके नियमों के मुताबिक़ किसी भी अभियुक्त को ऐसे देश में नहीं भेजा जा सकता जहाँ उसे मृत्युदंड दिया जा सकता हो.

यही वजह है कि भारत ने पुर्तगाल सरकार को आश्वासन दिया कि उन्हें मौत की सज़ा नहीं दी जाएगी.

मुंबई में ऑल इंडिया मुस्लिम यूथ फ़ोरम नाम के एक संगठन ने सालेम को मौत की सज़ा देने की माँग करते हुए प्रदर्शन भी किए हैं.

सीबीआई ने बताया कि अबू सालेम को आठ मामलों के आधार पर प्रत्यर्पित किया गया है.

अबू सालेम पुर्तगाल की जेल में फ़र्ज़ी पासपोर्ट पर यात्रा करने के आरोप में सज़ा काट चुके हैं.