सोमवार, 07 नवंबर, 2005 को 10:46 GMT तक के समाचार
केंद्र सरकार ने सोमवार को वोल्कर मामले की न्यायिक जाँच कराने की घोषणा की है.
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायधीश आरएस पाठक को जाँच का जिम्मा सौंपा है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने पत्रकारों को बताया कि जस्टिस पाठक विदेश मंत्री नटवर सिंह और कांग्रेस के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की जाँच करेंगे.
जस्टिस पाठक हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में न्यायाधीश भी रह चुके हैं.
इसके पहले भारत सरकार ने वोल्कर समिति से संबंधित तथ्यों को जुटाने के लिए वीरेंद्र दयाल को नियुक्त किया था.
इसके लिए उन्हें संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों की यात्रा के लिए भी अधिकृत किया गया है.
प्रवक्ता ने बताया कि वीरेंद्र दयाल यह जानने की कोशिश करेंगे कि किस आधार पर नटवर सिंह और कांग्रेस का नाम वोल्कर रिपोर्ट में आया जबकि जस्टिस पाठक इस पूरे मामले की न्यायिक जाँच करेंगे.
नटवर पर दबाव
हालांकि नटवर सिंह ने घोषणा की है कि वो इस्तीफ़ा नहीं देंगे लेकिन जानकारों का कहना है कि उन पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
इसके पहले रविवार को नटवर सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की थी.
इससे पहले प्रधानमंत्री निवास पर केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई थी जिसमें यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल, वित्तमंत्री पी चिदंबरम, मानव संसाधन एवं विकास मंत्री अर्जुन सिंह और क़ानून मंत्री हंसराज भरद्वाज सहित कई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित थे.
ग़ौरतलब है कि इराक़ में 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' की जाँच करने वाली वोल्कर समिति की रिपोर्ट में विदेश मंत्री नटवर सिंह के नाम आने के बाद से यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
वोल्कर समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्यक्रम से कांग्रेस और विदेश मंत्री नटवर सिंह को आर्थिक लाभ पहुँचा है.
संयुक्त राष्ट्र ने 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में भ्रष्टाचार की जाँच करने के लिए वोल्कर समिति का गठन किया था जिसमें दो हज़ार से ज़्यादा विदेशी कंपनियों पर सद्दाम हुसैन की सरकार को अवैध भुगतान करने का आरोप लगाया है.