सोमवार, 07 नवंबर, 2005 को 01:45 GMT तक के समाचार
भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आने वाला प्रस्ताव अगर कठोर हुआ तो भारत इसके विरोध में मत डाल सकता है.
इसी साल सितंबर में भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव का समर्थन किया था.
इस प्रस्ताव में कहा गया था कि अगर ईरान परमाणु अप्रसार संधि का पालन नहीं करता है तो अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को ये अधिकार होगा कि वह ये मामला सुरक्षा परिषद में ले जाए.
ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह उन देशों के साथ व्यापार समझौते की समीक्षा करेगा जिन देशों ने उसके ख़िलाफ़ मत दिया था.
विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा कि वे ये स्वीकार नहीं कर सकते कि आईएईए की बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ कोई कठोर क़दम उठाया जाए. उन्होंने कहा कि भारत कोई भी फ़ैसला अपना हित ध्यान में रखते हुए करेगा.
सितंबर में आईएईए की बैठक में प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के भारत के फ़ैसले की आलोचना हुई थी और सरकार में शामिल वामपंथी दलों ने भी इसकी आलोचना की थी.
लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया था कि ईरान को लेकर उसके रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है. सरकार ने कहा था कि भारत हमेशा से ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करता आया है.
उस समय भारत पर ये आरोप लगा था कि अमरीका के दवाब में उसने ईरान के ख़िलाफ़ मतदान किया था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भारत की ईरान नीति पर स्पष्टीकरण दिया था और कहा था कि भारत का वोट ईरान के ख़िलाफ़ नहीं था.