सोमवार, 07 नवंबर, 2005 को 11:08 GMT तक के समाचार
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य सरकार के उस क़ानून पर रोक लगा दी है जिसमें सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में मुस्लिम समुदाय के लोगों को पाँच प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई थी.
राज्य सरकार ने पिछले महीने ही विधानसभा में एक विधेयक पारित किया था जिसके मुताबिक ग़रीब मुस्लिम परिवारों के लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पाँच प्रतिशत तक आरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया था.
यह विधेयक को विधानसभा में इस वर्ष जून में लाया गया था जिसे पिछले महीने ही मंज़ूरी दी गई थी.
सरकार को इस कानून को रद्द् करने का निर्देश देते हुए हैदराबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अपने फ़ैसले में कहा है कि यह कानून असंवैधानिक है और इसे लागू नहीं किया जा सकता.
फ़ैसले में कहा गया है कि जिस आयोग की सिफ़ारिश पर यह क़ानून बनाया गया है, उस आयोग को पिछड़ेपन के निर्धारण का कोई अधिकार नहीं है.
ग़ौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस क़ानून का यह कहते हुए विरोध किया था कि यह मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के मकसद से बनाया गया है.
भाजपा ने आरोप लगाया था कि इस तरह संप्रदाय पर आधारित क़ानून बनाने से देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को क्षति पहुँची है.