http://www.bbcchindi.com

शनिवार, 05 नवंबर, 2005 को 08:57 GMT तक के समाचार

नटवर सिंह ने इस्तीफ़े की माँग ठुकराई

विदेश मंत्री नटवर सिंह ने वोल्कर समिति की रिपोर्ट को लेकर इस्तीफ़ा देने से साफ़ इनकार किया है.

उनका कहना था,'' मैं इस्तीफ़ा क्यों दूं. भाजपा तय नहीं कर सकती है कि भारत का विदेश मंत्री कौन होगा.''

ग़ौरतलब है कि भाजपा ने इराक़ के 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' से लाभ उठानेवालों में नाम आने के कारण उनके इस्तीफ़े की माँग की थी.

भाजपा ने इस्तीफ़े की माँग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है. साथ ही उसने घोषणा की है कि पार्टी नेता राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिलकर अपनी माँग दोहराएंगे.

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में नटवर सिंह ने कहा," मंत्रिमंडल में किसी को रखने का विशेषाधिकार प्रधानमंत्री का है पर उन्हें प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का विश्वास हासिल है. इसलिए भरोसा है कि मैं अपने पद पर बना रहूँगा.''

उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि उनपर और कांग्रेस पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं और उनका तथा पार्टी का तेल सौदों से कोई लेना-देना नहीं है.

वोल्कर के इस बयान पर कि उनकी रिपोर्ट इराक़ी रिकॉर्ड्स पर आधारित है, उन्होंने कहा कि ये सब मौजूदा इराक़ी सरकार के रिकॉर्ड पर आधारित है जिसकी दुनिया में कोई साख नहीं है.

समर्थन

इधर सीपीआई विदेश मंत्री के समर्थन में खुलकर आ गई है. सीपीआई महासचिव एबी बर्धन ने शुक्रवार को उनसे मुलाक़ात की.

उसके बाद बर्धन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' नटवर सिंह का मामला मज़बूत है. वोल्कर के नतीजे हास्यास्पद हैं. यहाँ तक कि रूसियों ने कहा है कि यह फर्जी दस्तावेज़ है.''

सीपीआई ने भी साफ़ तौर से कह दिया है कि विदेश मंत्री को अपने पद से इस्तीफ़ा देने की ज़रूरत नहीं है. इसके पहले सीपीएम भी उन्हें समर्थन दे चुकी है.

केंद्र सरकार ने गुरुवार को घोषणा की थी कि इराक़ में 'तेल के बदले अनाज कार्यक्रम' की जाँच करने वाली वोल्कर समिति की रिपोर्ट में विदेश मंत्री नटवर सिंह के नाम लिए जाने को लेकर वह गंभीर है.

सरकार का कहना है कि जल्द ही इस बारे में कोई फ़ैसला ले लिया जाएगा.

वोल्कर समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कार्यक्रम से कांग्रेस और विदेश मंत्री नटवर सिंह को आर्थिक लाभ पहुँचा है.

संयुक्त राष्ट्र ने 'तेल के बदले अनाज' कार्यक्रम में भ्रष्टाचार की जाँच करने के लिए वोल्कर समिति का गठन किया था जिसमें दो हज़ार से ज़्यादा विदेशी कंपनियों पर सद्दाम हुसैन की सरकार को अवैध भुगतान करने का आरोप लगाया है.